Aarti Sri Ramayan Ji Ki: हिंदू धर्म में रामायण को केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाला प्रेरणास्रोत माना जाता है। इसमें भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, त्याग, प्रेम, धर्म और कर्तव्य की ऐसी कथाएं समाहित हैं, जो हर युग में मनुष्य को सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। यही वजह है कि रामायण का पाठ करने के साथ-साथ इसकी आरती (Ramayan Aarti) का भी विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
'आरती श्री रामायणजी की, कीरति कलित ललित सिय पी की' - इन शब्दों से शुरू होने वाली यह आरती रामायण की महिमा का सुंदर गुणगान करती है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ रामायणजी की आरती करने से घर में सकारात्मकता आती है और भक्त को भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। रामनवमी, राम विवाह, रामचरितमानस पाठ, नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर इस आरती का गायन विशेष रूप से किया जाता है। हालांकि, इसके लिए किसी विशेष पर्व की प्रतीक्षा करना जरूरी नहीं है। भक्त प्रतिदिन भी इसका पाठ कर सकते हैं।
आरती श्री रामायणजी की (Aarti Sri Ramayan Ji Ki Lyrics)
आरती श्री रामायणजी की। कीरति कलित ललित सिय पी की।।
गावत ब्रहमादिक मुनि नारद। बाल्मीकि बिग्यान बिसारद।।
शुक सनकादिक शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी।।
आरती श्री रामायणजी की।।
गावत बेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस।।
मुनि जन धन संतान को सरबस। सार अंश सम्मत सब ही की।।
आरती श्री रामायणजी की।।
गावत संतत शंभु भवानी। अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी।।
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी। कागभुशुंडि गरुड़ के ही की।।
आरती श्री रामायण जी की।।
कलिमल हरनि बिषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की।।
दलनि रोग भव मूरि अमी की। तात मातु सब बिधि तुलसी की।।
आरती श्री रामायणजी की। कीरति कलित ललित सिय पीय की।।
आरती श्री रामायण जी की।।
भगवान श्रीराम की स्तुति
रामायण की आरती के बाद भगवान श्रीराम की इस सुंदर स्तुति का पाठ भी किया जाता है। इसमें प्रभु श्रीराम के श्यामल और कोमल स्वरूप, उनके साथ विराजमान माता सीता तथा हाथों में सुशोभित धनुष-बाण का वर्णन किया गया है।
नीलाम्बुज श्यामलकोमलांगम् सीता समारोपित वाम भागम्।
पाणौ महासायक चारुचापं नमामि रामं रघुवंश नाथम्।।
रामायणजी की आरती का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामायणजी की आरती करने से भक्त के मन में श्रद्धा, भक्ति और सद्भाव का भाव मजबूत होता है। इस आरती में रामायण की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि इसकी रचना और गुणगान को ब्रह्मा, नारद, महर्षि वाल्मीकि, भगवान शिव, माता पार्वती और अनेक ऋषि-मुनियों ने भी सम्मान दिया है।
