Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का त्योहार संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की सलामती के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं। इस पूजा की एक खास परंपरा है, जो अक्सर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। दरअसल, अहोई माता के चित्र में माता के साथ साही और उसके सात बच्चों की आकृतियां भी बनाई जाती हैं। आखिर अहोई माता की पूजा में साही और उसके बच्चों को इतना महत्व क्यों दिया जाता है? इसके पीछे एक रोचक और भावुक लोककथा प्रचलित है। आगे पढ़ें इसकी पौराणिक कथा।
अहोई माता के चित्र का वर्णन
अहोई अष्टमी पर पूजा के लिए दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाया जाता है या बाजार से कैलेंडर लाया जाता है। इस चित्र में माता के साथ साही और उसके बच्चों को भी स्थान दिया जाता है। कई क्षेत्रों में साही को स्याहु के नाम से भी जाना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार, साही और उसके बच्चों की आकृति संतान की रक्षा, मातृत्व और संतान के प्रति मां के स्नेह का प्रतीक मानी जाती है। यही वजह है कि अहोई माता की पूजा में इन आकृतियों को विशेष महत्व दिया जाता है।
साही और उसके बच्चों से जुड़ी पौराणिक कथा
अहोई अष्टमी से जुड़ी एक प्रचलित लोककथा के अनुसार, एक साहूकार की पत्नी के सात बेटे थे। एक बार कार्तिक मास में वह घर की मरम्मत और लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी लेने जंगल गई। वहां वह कुदाल से मिट्टी खोदने लगी। इसी दौरान अनजाने में उसकी कुदाल साही के एक बच्चे को लग गई, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। अपने बच्चे की मृत्यु देखकर साही बेहद दुखी हुई और उसने साहूकार की पत्नी को श्राप दे दिया।
लोककथा के अनुसार, इसके बाद महिला के सातों पुत्रों की मृत्यु हो गई। इस घटना से वह पूरी तरह टूट गई और अपने किए पर पछतावा करने लगी। अपने पुत्रों को खोने के दुख में महिला ने अपनी व्यथा गांव की बुजुर्ग महिलाओं को सुनाई। उन्होंने उसे अहोई माता की पूजा और व्रत करने की सलाह दी। महिला ने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ अहोई माता का व्रत रखा। उसने माता से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी और संतान की रक्षा की प्रार्थना की।
कथा के अनुसार, महिला की भक्ति और पश्चाताप से प्रसन्न होकर अहोई माता ने उसे आशीर्वाद दिया। इसके बाद उसके पुत्रों को जीवनदान मिला और उसका परिवार फिर से खुशहाल हो गया। हालांकि, इस कथा के अलग-अलग क्षेत्रीय संस्करणों में घटनाओं और पात्रों का वर्णन थोड़ा अलग मिलता है।
चित्र में साही और उसके बच्चों का महत्व
अहोई माता के चित्र में साही के साथ उसके बच्चों को दिखाने के पीछे संतान की खुशहाली और सुरक्षा की भावना जुड़ी हुई है। लोकपरंपरा में साही के बच्चों की आकृति को मातृत्व, संतान प्रेम और बच्चों के मंगल का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि पूजा के दौरान महिलाएं अहोई माता के साथ साही और उसके बच्चों की भी श्रद्धापूर्वक पूजा करती हैं।
अहोई अष्टमी का महत्व
अहोई अष्टमी की यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मां के प्रेम, पश्चाताप और क्षमा की भावना को भी दर्शाती है। साही की कथा महिलाओं को यह संदेश देती है कि जीव-जंतुओं के प्रति भी दया और करुणा का भाव रखना चाहिए। इस दिन माताएं अहोई माता से अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।
