Diwali Lakshmi Puja: दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और मां लक्ष्मी के स्वागत का पर्व है। इस दिन घरों में दीप जलाने से लेकर रंगोली बनाने और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने तक, हर परंपरा का अपना विशेष महत्व होता है। दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा में कई ऐसी चीजें भी रखी जाती हैं, जिन्हें सामान्य दिनों में शायद ही कोई विशेष रूप से इस्तेमाल करता हो। इन्हीं में कौड़ी, कमल गट्टा और गोमती चक्र प्रमुख हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि लक्ष्मी पूजन की थाली में इन तीनों चीजों को विशेष स्थान दिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इनका मां लक्ष्मी की पूजा से क्या संबंध है और इन्हें इतना शुभ क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन (Lakshmi Puja Samagri) में कौड़ी, कमल गट्टा और गोमती चक्र रखने के पीछे क्या धार्मिक मान्यताएं हैं।
लक्ष्मी पूजन में कौड़ी रखने की मान्यता
कौड़ी देखने में भले ही समुद्र से मिलने वाला एक साधारण शंख जैसा पदार्थ हो, लेकिन धार्मिक परंपराओं में इसे मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि कौड़ी समुद्र से प्राप्त होती है और मां लक्ष्मी का प्राकट्य भी समुद्र मंथन से हुआ था। इसी वजह से कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रिय प्रतीक माना जाता है।पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरणों में कौड़ी अर्पित करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है। कई परिवारों में पीली कौड़ियों को हल्दी या केसर से रंगकर पूजा में रखा जाता है। पूजा के बाद इन्हें तिजोरी, धन रखने के स्थान या पूजा घर में सुरक्षित रखने की परंपरा भी है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में आर्थिक संपन्नता बनी रहती है।
मां लक्ष्मी की पूजा में कमल गट्टा का महत्व
कमल का फूल मां लक्ष्मी का सबसे प्रमुख प्रतीक माना जाता है। धार्मिक चित्रों में भी देवी लक्ष्मी को कमल के आसन पर विराजमान दिखाया जाता है। कमल की इसी पवित्रता और धार्मिक महत्ता के कारण उसके बीज यानी कमल गट्टा को भी लक्ष्मी पूजन में विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि कमल गट्टा मां लक्ष्मी को प्रिय है और इससे उनकी पूजा करने पर धन-संपत्ति, वैभव और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कमल गट्टे की माला से मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। विशेष रूप से दिवाली की रात कमल गट्टे की माला से 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करने की परंपरा है।
गोमती चक्र और लक्ष्मी पूजन का संबंध
गोमती चक्र एक विशेष प्रकार का प्राकृतिक खोल होता है, जो मुख्य रूप से गोमती नदी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है। इसका आकार चक्र जैसा दिखाई देता है और एक तरफ उभरी हुई सर्पिल आकृति होती है। हिंदू धर्म में इसे भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतीक मानने की परंपरा भी प्रचलित है। चूंकि मां लक्ष्मी को भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माना जाता है, इसलिए गोमती चक्र को लक्ष्मी पूजन में रखना शुभ समझा जाता है। मान्यता है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी के सामने गोमती चक्र रखने से घर में सुख-शांति, सौभाग्य और समृद्धि का वास होता है। कुछ लोग पूजा के बाद गोमती चक्र को लाल या पीले कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी अथवा धन रखने के स्थान पर रखते हैं। इसे बुरी नजर और नकारात्मकता से बचाव का प्रतीक भी माना जाता है।
