व्रत त्योहार

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस क्यों कहा जाता है? जानें इसकी पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी को रूप चौदस क्यों कहा जाता है? दिवाली से एक दिन पहले आने वाला ये दिन बेहद महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा और महत्व।

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Narak Chaturdashi 2026

Narak Chaturdashi 2026: दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस जैसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाने, अभ्यंग स्नान करने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने की परंपरा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर नरक चतुर्दशी को रूप चौदस (Roop Chaudas) क्यों कहा जाता है? इसके पीछे केवल सौंदर्य और सुंदर दिखने की परंपरा ही नहीं, बल्कि एक दिलचस्प पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है। आइए जानते हैं इस पर्व का महत्व और इससे जुड़ी कथा।

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस क्यों कहते हैं?

नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन शरीर पर तेल लगाकर स्नान किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को शारीरिक शुद्धि के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक पवित्रता भी प्राप्त होती है। इस दिन होने वाले अभ्यंग स्नान से हमारा रूप निखरता है, इसलिए इसी परंपरा के कारण इस दिन को रूप चौदस कहा जाने लगा।