Shri Munda Katiya Ganesh Temple: उत्तराखंड में ऐसे तमाम धार्मिक स्थल हैं जिनसे अनोखी मान्यताएं जुड़ी हैं। इन्हीं में से एक है श्री मुंडा कटिया गणेश मंदिर। रुद्रप्रयाग जिले की केदार घाटी में स्थित इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां भगवान गणेश का सिर कटने की घटना हुई थी। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां पूजे जाने वाले गणेश जी का स्वरूप है। आमतौर पर आपने गणपति की हाथी के सिर वाली प्रतिमा देखी होगी, लेकिन यहां गणेश जी को सिरहीन रूप में पूजा जाता है। यही अनोखी परंपरा इस मंदिर को दूसरे गणेश मंदिरों से अलग बनाती है।
गणेश जी का सिर कटने से जुड़ी है मान्यता
मुंडा कटिया मंदिर की कहानी भगवान गणेश के जन्म से जुड़ी उस प्रसिद्ध पौराणिक कथा से जुड़ती है, जिसे आपने शायद बचपन से सुना होगा। मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी की रचना की थी और उन्हें अपने द्वार की रखवाली करने के लिए कहा था। उस समय भगवान शिव वहां पहुंचे, लेकिन गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। गणेश जी अपने माता के आदेश का पालन कर रहे थे। इसी बात को लेकर भगवान शिव और गणेश के बीच विवाद हुआ। कथा के अनुसार, क्रोधित होकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया। इसके बाद जब देवी पार्वती को अपने पुत्र के बारे में पता चला तो वह बेहद नाराज हुईं। उन्होंने भगवान शिव से गणेश को फिर से जीवित करने की मांग की। इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का सिर लगाकर उन्हें नया जीवन दिया।
मंदिर को उसी घटना से क्यों जोड़ा जाता है
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, मुंडा कटिया वही स्थान है जहां भगवान गणेश का सिर कटने की घटना हुई थी। इसी वजह से यहां गणेश जी की प्रतिमा उनके बाद वाले हाथी-मुखी स्वरूप में नहीं, बल्कि सिरहीन रूप में पूजे जाने की परंपरा बताई जाती है। यानी यहां मौजूद स्वरूप को गणेश जी के उस समय से जोड़ा जाता है, जब उनका सिर कट चुका था और उन्हें हाथी का सिर अभी प्राप्त नहीं हुआ था।
यह मान्यता ही मंदिर को खास बनाती है और दूर-दूर से श्रद्धालुओं को इस स्थान की ओर आकर्षित करती है।
सोनप्रयाग से कैसे पहुंचें
अगर आप इस मंदिर के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो सोनप्रयाग को आधार बनाना सुविधाजनक हो सकता है। सोनप्रयाग उत्तराखंड के केदारनाथ मार्ग पर पड़ने वाला प्रमुख स्थान है। सड़क मार्ग से सोनप्रयाग पहुंचने के बाद मंदिर की ओर आगे बढ़ा जा सकता है। अंतिम कुछ दूरी पैदल तय करने की बात भी बताई जाती है। पहाड़ी वातावरण और नदी के आसपास का रास्ता इस छोटी यात्रा को यादगार बना सकता है। हवाई यात्रा करने वालों के लिए देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट प्रमुख विकल्प है। इसके बाद सड़क मार्ग से सोनप्रयाग की ओर जाना पड़ता है। रेल से आने वाले यात्री ऋषिकेश या देहरादून तक पहुंचकर आगे सड़क मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं।
