Rishi Panchami 2026 Today Aarti: ऋषि पंचमी का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास होता है। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ सप्त ऋषियों और महर्षि वशिष्ठ की पत्नी माता अरुंधती की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। ऋषि कश्यप, ऋषि अत्रि, ऋषि भारद्वाज, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि गौतम, ऋषि जमदग्नि और ऋषि वशिष्ठ सातों सप्त ऋषियों में शामिल हैं। मान्यता है कि इस पंचमी पर पूजा करने से अनजाने में हुए पाप नष्ट होते हैं। हालांकि, महिलाएं ऋषि पंचमी का व्रत रजस्वला दोष से मुक्त होने के लिए रखती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी मनाई जाती है। इस बार आज 15 सितंबर 2026, मंगलवार को ऋषि पंचमी मनाई जा रही है।
ऋषि पंचमी के दिन माता और सप्त ऋषियों को फल, फूल, मिठाई, वस्त्र और जल आदि पूजा सामग्री अर्पित की जाती है, जिसके बाद आरती करके पूजा का समापन होता है। आरती माता और ऋषियों के प्रति सम्मान, प्रेम और भक्ति प्रकट करने का एक तरीका है। चलिए अब जानें ऋषि पंचमी की पूजा के अंत में पढ़ी जाने वाली 2 प्रमुख आरतियों के लिरिक्स के बारे में।
ऋषि पंचमी की आरती हिंदी में (rishi panchami aarti lyrics in hindi)
श्री हरि हर गुरु गणपति.... ऋषि पंचमी की आरती (shri hari har guru ganpati aarti lyrics in hindi)
श्री हरि हर गुरु गणपति, सबहु धरि ध्यान।
मुनि मंडल श्रृंगार युक्त, श्री गौतम करहुँ बखान।। ॐ जय
गौतम त्राता, स्वामी जी गौतम त्राता ।
ऋषिवर पूज्य हमारे, मुद मंगल दाता।। ॐ जय।।
द्विज कुल कमल दिवाकर, परम न्यायकारी।
जग कल्याण करन हित, न्याय रच्यौ भारी।। ॐ जय।।
पिप्लाद सुत शिष्य आपके, सब आदर्श भये।
वेद शास्त्र दर्शन में, पूर्ण कुशल हुए।।ॐ जय।।
गुर्जर करण नरेश विनय पर तुम पुष्कर आये ।
सभी शिष्य सुतगण को, अपने संग लाये।।ॐ जय।।
अनावृष्टि के कारण संकट आन पड़्यो।
भगवान आप दया करी, सबको कष्ट हरयो।।ॐ जय।।
पुत्र प्राप्ति हेतु , भूप ने यज्ञ कियो।
यज्ञ देव के आशीष से, सुत ने जन्म भयो।।ॐ जय।।
भूप मनोरथ पूर्ण करके, चिंता दूर करी।
प्रेतराज पामर की, निर्मल देह करी।।ॐ जय।।
ऋषिवर अक्षपाद की आरती,जो कोई नर गावे।
ऋषि की पूर्ण कृपा से, मनोवांछित फल पावे।।ॐ जय।।
आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की.... ऋषि कश्यप की आरती
आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की, अदिति पति मरीचि नंदन की॥
जाके तप से सृष्टि बन जावे, लोभ-दोष मन निकट न आवे।
ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की, आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की॥
सत्य कर्म संग सत्ययुग लाए, सत्य घटे तो त्रेता कहलाए।
एक कोने में पाप जो पाए, पाप देख सत्ययुग घबराए॥
श्री राम को आप ही लाए, ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की,
आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की॥
पाप कर्म जब रुक नहीं पाए, दो कोनों में पाप जो पाए।
यही काल द्वापर कहलाए, श्री श्याम को आप ही लाए॥
ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की, आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की॥
अब है घोर पाप का कलियुग, सत्य को ढूंढूं अब मैं निसदिन।
सत्य नहीं अब आगे आता, एक कोने में खुद को पाता।
कौन सुने मनुहार हमारी, जय जय जय ऋषिवर तुम्हारी॥
किसे पुकारें राम कहें अब, किसे पुकारें श्याम कहें अब।
अब तुम ही हो एक सहारे, ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की,
आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की॥
महर्षि कश्यप जी की आरती जो जन गावे, मुनि प्रेम सहित गावे।
कहत ब्रह्मज्ञानी, वही ऋषिवादी बन कर, सबकी नैया पार लगावे॥
ऐसे श्रेष्ठ मुनि ऋषिवर जी की, आरती कीजिए महर्षि कश्यप जी की॥
