Diwali Puja 2026: दिवाली का त्योहार आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन ज्यादातर लोग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं, ताकि घर में सुख-समृद्धि आए और जीवन की परेशानियां दूर हों। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली की पूजा (Diwali Puja Vidhi) में मां लक्ष्मी और गणेश जी के साथ मां सरस्वती को भी शामिल करना चाहिए? ज्योतिषाचार्य डॉ. जय मदान के अनुसार, इन तीनों देवी-देवताओं की पूजा एक खास क्रम और तरीके से करने का महत्व है। उनका मानना है कि इससे जीवन में धन के साथ ज्ञान, समझदारी और सही फैसले लेने की क्षमता का भी महत्व समझ आता है।
दिवाली की पूजा में क्यों जरूरी है तीन देवी-देवताओं का साथ
डॉ. जय मदान के मुताबिक, हिंदू परंपरा में त्रिदेव और त्रिदेवी का विशेष महत्व है। इसी तरह मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां दुर्गा या काली को भी शक्ति के अलग-अलग स्वरूपों के रूप में देखा जाता है। दिवाली की पूजा में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती को एक साथ पूजने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे एक खास सोच है। मां लक्ष्मी धन और समृद्धि का प्रतीक हैं, भगवान गणेश बुद्धि और विघ्न दूर करने वाले देवता हैं, जबकि मां सरस्वती ज्ञान और विवेक का प्रतीक मानी जाती हैं। यानी जीवन में तरक्की के लिए इन तीनों का आशीर्वाद जरूरी माना गया है।
त्रिकोण के आकार में रखें तीनों देवी-देवताओं की मूर्तियां
डॉ. जय मदान बताती हैं कि पूजा के दौरान तीनों देवी-देवताओं को त्रिकोण यानी पिरामिड के आकार में रखना चाहिए। इसमें मां लक्ष्मी को सबसे आगे और बीच में रखें। भगवान गणेश को मां लक्ष्मी के दाईं ओर और मां सरस्वती को बाईं ओर स्थान दें। इस तरह तीनों की व्यवस्था एक त्रिकोण का आकार बनाएगी। मान्यता के अनुसार, त्रिकोण और पिरामिड को ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस तरह मूर्तियों को रखने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।
गणेश जी और मां सरस्वती की पूजा का क्या है महत्व
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। यानी वे जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं। वहीं मां सरस्वती ज्ञान, बुद्धि और विवेक प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। डॉ. जय मदान के अनुसार, जीवन में केवल धन होना काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने की समझ भी होनी चाहिए। जब व्यक्ति के पास ज्ञान और समस्याओं को हल करने की क्षमता होती है, तभी वह अपने लक्ष्यों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाता है। इसी वजह से दिवाली पर इन तीनों की एक साथ पूजा करने की सलाह दी जाती है।
पूजा के आसपास जरूर रखें ये पांच चीजें
डॉ. जय मदान के मुताबिक, अगर आपके पास रोजाना लंबी पूजा करने का समय नहीं है, तब भी देवी-देवताओं के पास पांच तत्वों से जुड़ी चीजें रख सकते हैं। ये पांच तत्व इस प्रकार हैं।
- फूल: फूल आकाश तत्व का प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए पूजा में ताजे फूल जरूर रखें।
- जल: एक छोटे लोटे या पात्र में पानी रखें। यह जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
- दीपक: पूजा के दौरान दीपक जलाएं। यह अग्नि तत्व का प्रतीक है।
- फल: भगवान के सामने फल या कोई खाद्य सामग्री रखें। यह पृथ्वी तत्व को दर्शाता है।
- धूप-अगरबत्ती: पूजा में धूप या अगरबत्ती जलाएं। इससे निकलने वाली सुगंध और धुआं वायु तत्व का प्रतीक माना जाता है।
पांच तत्वों से जुड़ी है पूजा की यह परंपरा
डॉ. जय मदान के अनुसार, हमारा शरीर भी पांच तत्वों से मिलकर बना माना जाता है। ऐसे में पूजा के दौरान इन पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाली चीजें भगवान के सामने रखना अपने अस्तित्व को उनके सामने समर्पित करने जैसा है। इसके लिए घंटों पूजा करना जरूरी नहीं है। आप कुछ मिनट भी श्रद्धा के साथ हाथ जोड़कर प्रार्थना कर सकते हैं।
दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाने की भी दी सलाह
डॉ. जय मदान ने दिवाली पर दीपक जलाने के साथ स्वदेशी चीजों को प्राथमिकता देने की बात भी कही है। उन्होंने चाइनीज लाइट्स की जगह भारत में बने दीये और मोमबत्तियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी। उनके मुताबिक, दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाना हमारी परंपरा से जुड़ा है। इससे त्योहार की रौनक भी बढ़ती है और स्थानीय कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलता है।
धन के साथ ज्ञान और समझदारी भी है जरूरी
दिवाली की पूजा का उद्देश्य केवल धन और सुख-समृद्धि की कामना करना नहीं है। जीवन में सही फैसले लेना, मुश्किलों का सामना करना और अपने लक्ष्य तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती की एक साथ पूजा इसी सोच को दर्शाती है। डॉ. जय मदान की बताई इस पूजा विधि के अनुसार, इस दिवाली अपने घर के मंदिर में तीनों देवी-देवताओं को उचित स्थान दें और पांच तत्वों का ध्यान रखते हुए श्रद्धा से पूजा करें।
