Somvar Ki Aarti Lyrics In Hindi: सप्ताह के सभी दिन किसी न किसी भगवान को समर्पित हैं। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें हिंदू धर्म में सर्वोच्च शक्ति, ब्रह्मांड के सृष्टिकर्ता, संहारक और पालक के रूप में पूजा जाता है। शिव जी को महादेव, आदियोगी, भोलेनाथ, शंकर, नीलकंठ, शंभू, नागेश्वर और सदाशिव आदि नामों से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव जी की पूजा करने से विभिन्न आध्यात्मिक और मानसिक लाभ होते हैं। खासकर, सोमवार के दिन शिव जी की पूजा के दौरान उनकी आरती करना शुभ होता है।
आरती शिव जी के प्रति अटूट भक्ति, श्रद्धा, समर्पण और प्रेम व्यक्त करने का एक आध्यात्मिक साधन है। आरती के अलावा चालीसा, मंत्र, कवच और स्तोत्र के जरिए भी भोलेबाबा को खुश किया जा सकता है। चलिए अब जानते हैं सोमवार की आरती लिरिक्स।
सोमवार को कौन सी आरती करनी चाहिए? (somwar ko kaun si aarti karni chahie)
पौराणिक शास्त्रों में भगवान शिव की वैसे तो कई आरतियों का उल्लेख है, लेकिन 2 आरतियां 'ॐ जय शिव ओंकारा...'और 'ॐ जय गंगाधर जय हर...' सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और प्रचलित हैं। इन दोनों आरतियों में शिव जी के स्वरूप, कृपा, भक्ति और करुणा आदि का वर्णन किया गया है। मान्यता है कि जो भक्त सोमवार के दिन सच्चे मन से शिव जी की आरती करता है, भोलेबाबा सदा उसका साथ देते हैं।
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सोमवार की आरती (somvar ki aarti in hindi)
ॐ जय शिव ओंकारा... (om jai shiv omkara aarti lyrics in hindi)
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव...
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव...
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव...
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव...
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता,
जगकर्ता जगभर्ता जग संहारकर्ता॥ ॐ जय शिव...
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर में शोभित यह त्रिवेद का टीका॥ ॐ जय शिव...
शिव ओंकारा शिव ओंकारा हर ऊंकारा,
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...
ॐ जय गंगाधर जय हर... (om jai gangadhar har shiv aarti lyrics in hindi)
ॐ जय गंगाधर जय हर, जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं, कृपया जगदीशा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कैलासे गिरिशिखरे, कल्पद्रुमविपिने।
गुंजति मधुकरपुंजे, कुंजवने गहने॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कोकिलकूजित खेलत, हंसावन ललिता।
रचयति कलाकलापं, नृत्यति मुदसहिता॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
तस्मिंल्ललितसुदेशे, शाला मणिरचिता।
तन्मध्ये हरनिकटे, गौरी मुदसहिता॥
क्रीडा रचयति, भूषारंचित निजमीशम्।
इंद्रादिक सुर सेवत, नामयते शीशम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत, हृदये मुदसहिता।
किन्नर गायन कुरुते, सप्त स्वर सहिता॥
धिनकत थै थै धिनकत, मृदंग वादयते।
क्वण क्वण ललिता वेणुं, मधुरं नाटयते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
रुण रुण चरणे रचयति, नूपुरमुज्ज्वलिता।
चक्रावर्ते भ्रमयति, कुरुते तां धिक तां॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
तां तां लुप चुप, तां तां डमरू वादयते।
अंगुष्ठांगुलिनादं, लासकतां कुरुते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कपूर्रद्युतिगौरं, पञ्चाननसहितम्।
त्रिनयनशशिधरमौलिं, विषधरकण्ठयुतम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
सुन्दरजटायकलापं, पावकयुतभालम्।
डमरु त्रिशूल पिनाकं, करधृतनृकपालम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
मुण्डै रचयति माला, पन्नगमुपवीतम्।
वामविभागे गिरिजा, रूपं अतिललितम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
सुन्दरसकलशरीरे, कृतभस्माभरणम्।
इति वृषभध्वजरूपं, तापत्रयहरणं॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
शंखनिनादं कृत्वा, झल्लरि नादयते।
नीराजयते ब्रह्मा, वेदऋचां पठते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अतिमृदुचरणसरोजं, हृत्कमले धृत्वा।
अवलोकयति महेशं, ईशं अभिनत्वा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
ध्यानं आरति समये, हृदये अति कृत्वा।
रामस्त्रिजटानाथं, ईशं अभिनत्वा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
संगतिमेवं प्रतिदिन, पठनं यः कुरुते।
शिवसायुज्यं गच्छति, भक्त्या यः श्रृणुते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
