आध्यात्मिक दुनिया में महावतार बाबाजी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्हें एक रहस्यमयी योगी और क्रिया योग की परंपरा से जुड़ा दिव्य गुरु माना जाता है। उनके जीवन और अस्तित्व को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। हाल ही में भक्ति टाइम्स के साथ बातचीत के दौरान आध्यात्मिक गुरु मोहनजी ने महावतार बाबाजी से जुड़े अपने आध्यात्मिक सफर से जुड़े कुछ खास अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे एक अनजान फोन कॉल से उनकी आध्यात्मिक यात्रा ने नया मोड़ लिया और किस तरह उन्हें बाबाजी से जुड़े दिव्य अनुभव हुए।
एक अनजान ईमेल से शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा
मोहनजी ने बताया कि जब वह यूएई में एक कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे, तब उन्हें एक अनजान ईमेल मिला। उसमें लिखा था कि एक इंटरगैलेक्टिक मास्टर उनसे बात करना चाहते हैं। शुरुआत में उन्हें यह किसी तरह का स्कैम लगा और उन्होंने ईमेल डिलीट कर दिया। हालांकि, अगले सप्ताह फिर वैसा ही ईमेल आया। इस बार उन्हें बताया गया कि मास्टर जानते हैं कि उन्होंने पिछला संदेश डिलीट कर दिया था। इसके बाद मोहनजी ने दिए गए अमेरिकी नंबर पर कॉल किया। बातचीत के दौरान महिला की आवाज अचानक एक गहरी पुरुष आवाज में बदल गई। मोहनजी के मुताबिक, उस व्यक्ति ने उनके बचपन की ऐसी बातें बताईं, जिनके बारे में उनके माता-पिता तक नहीं जानते थे।
बेटी की मौत से जुड़े सवाल का मिला जवाब
बातचीत के दौरान मोहनजी ने अपनी बेटी की सड़क दुर्घटना में हुई दुखद मौत को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि उनकी बेटी के साथ ऐसा क्यों हुआ? इस पर उस आवाज ने कहा कि मोहनजी को दुनिया में एक बड़ा काम करना है। वह एक सफल बिजनेसमैन बन सकते थे, लेकिन उनका असली उद्देश्य कुछ और है। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। मोहनजी के अनुसार, उस बातचीत में राजयोग और आध्यात्मिक मार्ग का भी जिक्र हुआ। बातचीत के अंत में उन्होंने उस मास्टर से दोबारा जुड़ने की इच्छा जताई।
अचानक हुआ महावतार बाबाजी का अनुभव
मोहनजी ने बताया कि महावतार बाबाजी से उनका पहला अनुभव भी अचानक हुआ। एक दिन वह अपने अमेरिकी दोस्त के साथ बैठे थे, तभी उन्हें ध्यान कक्ष में आने की आवाज सुनाई दी। वहां पहुंचकर उन्हें शरीर के भीतर सोडा वाटर के बुलबुलों जैसी हलचल महसूस हुई।
जब उन्होंने ध्यान लगाने की कोशिश की, तो उन्हें भीतर से आवाज आई कि ध्यान मत करो, मैं तुम पर काम कर रहा हूं। इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या यह बाबाजी हैं। मोहनजी के मुताबिक, कुछ पल के लिए उन्हें कमल मुद्रा में बैठे बाबाजी की झलक दिखाई दी।
संदेह करने पर दोस्त ने कही हैरान करने वाली बात
मोहनजी ने बताया कि इस अनुभव के दौरान उनके मन में कई सवाल उठ रहे थे। करीब आधे घंटे बाद उन्होंने दोबारा पूछा कि क्या सच में बाबाजी ही हैं। इसके बाद अनुभव धीरे-धीरे खत्म हो गया। जब वह अपने कमरे की तरफ लौटे, तो उनके अमेरिकी दोस्त ने अचानक पूछा कि क्या उन्होंने बाबाजी पर संदेह किया था? यह सुनकर मोहनजी हैरान रह गए। उनके मुताबिक, उस दोस्त को बाबाजी ने ही भारत भेजा था।
बाबाजी ने दिया लोगों के बीच जाने का संदेश
मोहनजी के अनुसार, करीब ढाई साल बाद उन्हें बाबाजी से दोबारा अनुभव हुआ। इस दौरान उन्हें राजयोग के मार्ग और अपने जीवन के उद्देश्य के बारे में बताया गया। बाबाजी ने उन्हें लोगों के बीच जाकर आध्यात्मिक ज्ञान साझा करने के लिए कहा। शुरुआत में मोहनजी इसके लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि वह निजी जीवन जीना चाहते थे। लेकिन उन्हें समझाया गया कि आध्यात्मिक ज्ञान केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे दूसरों तक भी पहुंचाना जरूरी है।
दिव्य भस्म से जुड़ा एक और अनुभव
मोहनजी ने साल 2015-16 के आसपास का एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वह बेंगलुरु में द्वि अम्मा के साथ बैठे थे, तभी उन्हें बाबाजी की उपस्थिति महसूस हुई। बाबाजी ने एक खाली कटोरे की तरफ इशारा किया, जो अचानक भस्म से भर गया। मोहनजी के मुताबिक, यह भस्म उनकी सुरक्षा के लिए दी गई थी। जब भस्म कम होने की बात कही गई, तो कटोरा दोबारा भर गया। उन्होंने बताया कि यह बाबाजी का उनके साथ आखिरी प्रत्यक्ष अनुभव था।
