Ashwin Navpad Oli 2026 Today: आश्विन नवपद ओली पर्व को जैन धर्म के लोग बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। साल में 2 बार ये पर्व मनाया जाता है। सबसे पहले चैत्र माह में आता है, जिसके बाद दूसरी बार आश्विन नवपद ओली पर्व को आश्विन माह में मनाया जाता है। दोनों ही महीनों में ये पर्व कुल 9 दिनों तक चलता है, जिसका आरंभ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि से और समापन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होता है। पंचांग के अनुसार, आज 26 अक्टूबर 2026, सोमवार को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है, जिसके कारण आज आश्विन नवपद ओली पर्व मनाया जा रहा है। आज यहां पर आप आश्विन नवपद ओली पर्व के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे।
आश्विन नवपद ओली पर्व का महत्व
आश्विन नवपद ओली पर्व के 9 दिनों में साधक आयंबिल तप करते हैं। आयंबिल शब्द 'आयाम' और 'अम्ल' दो शब्दों से मिलकर बना है। इसमें आयाम का अर्थ 'समस्त' है, जबकि अम्ल शब्द 'रस' को दर्शाता है। ऐसे में आयंबिल का अर्थ हुआ 'समभाव यानी सबके प्रति एक समान दृष्टिकोण रखने की साधना करना और रस का परित्याग करना।'
बता दें कि इस पर्व को मनाने का मुख्य उद्देश्य मोह का त्याग कर अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण और आत्मशुद्धि करना है। हालांकि, आश्विन नवपद ओली पर्व के दौरान स्वाद का मोह छोड़ने के साथ-साथ मन, वचन और काया से शुद्ध रहना भी जरूरी होता है। इस दौरान क्रोध, लोभ और अहंकार के जाल में व्यक्ति को फंसने से बचना होता है।
आश्विन नवपद ओली पर्व में किसकी पूजा होती है?
जैन धर्म के लोग आश्विन नवपद ओली पर्व में बहुत ही शुद्ध भाव से सिद्धचक्र यंत्र के 9 सर्वोच्च पदों, पंचपरमेष्ठी और 4 धर्म तत्वों की पूजा करते हैं। अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और सम्यक तप 9 पद हैं, जिन्हें पौराणिक शास्त्रों में मोक्ष का मार्ग बताया गया है।
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दिन में केवल एक बार किया जाता है भोजन
बता दें कि नवपद ओली पर्व के दौरान भक्त सूर्यास्त से पहले दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं। इस दौरान जो भोजन किया जाता है, वो केवल गेहूं, चावल, चने, मूंग की दाल और उड़द की दाल आदि अनाज को उबालकर बनाया जाता है। भोजन में तेल, घी, दूध, दही, चीनी, मक्खन, मलाई, गुड़, शहद, हरी पत्तेदार सब्जियों और मसालों का इस्तेमाल करना पूर्ण रूप से वर्जित होता है।
