Balram Jayanti 2026: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को बलराम जयंती यानी हल षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को शक्ति, पराक्रम और कृषि के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बलराम जी का प्रमुख अस्त्र हल है, इसलिए इस पर्व का संबंध कृषि और धरती से भी जोड़ा जाता है। आगे जानें बलराम जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त (Balram Jayanti Puja Muhurat) और पूजन की विधि।
2026 में कब है बलराम जयंती?
वर्ष 2026 में बलराम जयंती हल षष्ठी के नाम से मनाई जाएगी। यह पर्व विशेष रूप से ग्रामीण और कृषि प्रधान परंपराओं में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान बलराम के साथ हल और कृषि से जुड़ी वस्तुओं का भी प्रतीकात्मक रूप से पूजन किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ पूजा और व्रत करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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बलराम जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में बलराम जयंती के दिन पूजा के लिए प्रातः 11:02 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक का समय शुभ रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु भगवान बलराम की पूजा, व्रत कथा और आराधना कर सकते हैं। पूजा के लिए पहले घर या पूजा स्थान को साफ करके भगवान बलराम और श्रीकृष्ण का स्मरण करना चाहिए।
भगवान बलराम की पूजा का महत्व
पौराणिक परंपरा में बलराम को भगवान विष्णु के शेषनाग स्वरूप से संबंधित माना जाता है। वे श्रीकृष्ण के बड़े भाई थे और उनके व्यक्तित्व में शक्ति, साहस, अनुशासन और कर्तव्य का विशेष महत्व दिखाई देता है। उनके हाथ में रहने वाला हल उन्हें कृषि और धरती से जोड़ता है। यही वजह है कि हल षष्ठी पर प्रकृति, कृषि और अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।
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भगवान बलराम की पूजा विधि
पूजा के लिए सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान बलराम और श्रीकृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करें। उन्हें रोली, अक्षत, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। भगवान बलराम के प्रमुख प्रतीक हल का भी स्मरण करते हुए पूजा करें। इसके बाद बलराम जी की कथा सुनें या पढ़ें और संतान की सुख-समृद्धि की कामना करें।
हल षष्ठी के व्रत में कई स्थानों पर विशेष आहार नियमों का पालन किया जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन खेत में उगे अनाज और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से परहेज करने की मान्यता है। अलग-अलग क्षेत्रों में व्रत की परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है।
संतान की मंगलकामना का खास पर्व
हल षष्ठी को माताएं विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता में भगवान बलराम को शक्ति और संरक्षण का प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा के साथ संतान के लिए मंगलकामना करना विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बलराम जयंती केवल भगवान बलराम की आराधना का पर्व नहीं है, बल्कि यह धरती, कृषि, अन्न और परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करके श्रद्धालु भगवान बलराम का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
