Karwa Chauth: करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और आस्था का प्रतीक माना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि व्रत के दिन या उससे ठीक पहले महिलाओं को मासिक धर्म (पीरियड्स) आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर महिलाएं दुविधा में रहती हैं कि क्या उन्हें व्रत रखना चाहिए या नहीं। ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, इसलिए इस स्थिति में व्रत छोड़ने की आवश्यकता नहीं होती है।
धार्मिक दृष्टिकोण से, महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ करवा चौथ का निर्जला व्रत रख सकती हैं। इस दौरान सोलह श्रृंगार करना और व्रत के नियमों का पालन करना पूरी तरह मान्य है। हालांकि, पूजा-पाठ से जुड़े कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि व्रत की पवित्रता बनी रहे।
पीरियड्स के दौरान पूजा और अर्घ्य के नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मासिक धर्म के समय महिलाओं को पूजा की सामग्री, भगवान की मूर्तियों या पूजा की थाली को सीधे स्पर्श करने से बचना चाहिए। यदि आप व्रत रख रही हैं, तो आप कथा सुन सकती हैं और पूजा में शामिल हो सकती हैं, लेकिन पूजा अनुष्ठान स्वयं करने के बजाय परिवार के किसी अन्य सदस्य या पति की सहायता लेना उचित रहता है।
करवा चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य (जल अर्पित करना) देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है। पीरियड्स के दौरान अर्घ्य देने के लिए लोटे को स्वयं न छुएं। आप अपने पति या घर के किसी अन्य सदस्य से लोटे में जल भरवाकर उन्हें अर्घ्य देने के लिए कह सकती हैं। इस दौरान आप पास खड़ी होकर हाथ जोड़कर चंद्र देव से प्रार्थना कर सकती हैं। यदि आप चाहें, तो शाम के समय स्नान के बाद स्वयं भी दूर से अर्घ्य की प्रक्रिया में शामिल हो सकती हैं।
सरगी और पहले व्रत को लेकर सावधानियां
करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सास द्वारा दी गई सरगी से होती है। यदि आपको पीरियड्स हैं, तो सरगी की थाली या रसोई में रखे बर्तनों को सीधे स्पर्श न करें। आप परिवार के किसी सदस्य की मदद से सरगी ग्रहण कर सकती हैं, इसमें कोई दोष नहीं माना जाता है। इसी प्रकार, यदि यह आपका विवाह का पहला करवा चौथ है, तो व्रत को छोड़ने के बजाय पूरी निष्ठा से निर्जला व्रत रखें और सोलह श्रृंगार करें। बस ध्यान रखें कि पूजा की सामग्री और मूर्तियों को स्पर्श न करें। रात में चंद्रमा के दर्शन और पति का चेहरा देखकर आप अपना व्रत संपन्न कर सकती हैं।
