Samvatsari Parva 2026 Today: 8 सितंबर 2026 से श्वेतांबर जैन संप्रदाय के लोगों का पर्युषण पर्व शुरू हुआ था, जिसका 8 दिनों के बाद आज 15 सितंबर को समापन हो रहा है। पर्युषण पर्व के आखिरी दिन संवत्सरी पर्व मनाया जाता है, जिसे विश्व-मैत्री दिवस के नाम से भी जाना जाता है। 'संवत्सर' का अर्थ 'वर्ष' होता है। वर्ष में एक बार आने वाले इस दिन को संवत्सरी कहते हैं। इस दिन लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं और उन्हें 'मिच्छामी दुक्कड़म' बोलते हैं। 'मिच्छामी दुक्कड़म' का अर्थ है 'यदि मैंने जाने-अनजाने में आपको कष्ट पहुंचाया है तो मेरे वो सारे पाप मिथ्या (निष्फल) हों और मैं आपसे क्षमा मांगता हूं।'
आज यहां पर आप संवत्सरी पर्व के मुख्य उद्देश्य और नियमों के बारे में जानेंगे। साथ ही दशलक्षण पर्व 2026 की तिथि के बारे में पता चलेगा।
संवत्सरी पर्व मनाने का मुख्य उद्देश्य
लोगों के मन से बैर, क्रोध, द्वेष और कड़वाहट को मिटाकर शांति, दोस्ती और अहिंसा के उद्देश्य से हर साल संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से 'संवत्सरी प्रतिक्रमण' भी किया जाता है, जो आत्म-शुद्धि और मन के विकारों को दूर करने का साधन है।
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संवत्सरी पर्व के दिन क्या करें?
- अहिंसा का पालन करें।
- जरूरतमंद लोगों को दान दें।
- अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।
- मन को शांत करके आत्मचिंतन करें।
- मंत्र जाप करें और धार्मिक पुस्तकों का पाठ करें।
- संयमित जीवन जिएं और शुद्ध सात्विक आहार करें।
- बेजुबान जानवरों की सेवा करें और उन्हें भोजन कराएं।
- साधु-साध्वियों की सेवा करें और उनके आहार की व्यवस्था करें।
- पूर्व में किए गए पापों के लिए क्षमा मांगें और अच्छा इंसान बनने का संकल्प लें।
संवत्सरी पर्व के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
- किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं।
- किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल न हों।
- क्रोध, माया, मोह और लोभ के जाल में न फंसें।
- किसी की निंदा न करें, न ही गलत बातें कहें और न ही झूठ बोलें।
- चोरी न करें और न ही किसी तरह की बेईमानी करें।
- भोग-विलास से दूर रहें और अपनी इंद्रियों को वश में रखने का प्रयास करें।
- रात्रि में भोजन न करें।
- समय बर्बाद न करें।
- किसी के प्रति अपने मन में बैर न रखें।
दशलक्षण पर्व 2026 की तिथि
कल 16 सितंबर 2026 से दिगंबर जैन संप्रदाय के लोगों का पर्युषण पर्व शुरू हो रहा है, जो 10 दिन बाद 25 सितंबर, शुक्रवार को समाप्त होगा। पर्युषण पर्व को दशलक्षण पर्व के नाम से भी जाना जाता है, जिस दौरान भक्तजन व्रत, आत्म-शुद्धि, संयम, क्षमा और तपस्या के कठिन नियमों का पालन करते हैं।
