वर्ष 2026 में 28 अगस्त का दिन काफी चर्चा में है क्योंकि इस दिन रक्षाबंधन का पावन पर्व है और इसी तिथि पर साल का दूसरा व अंतिम चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। सनातन परंपरा में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान विशेषकर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर समाज में कई तरह की मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं, जिनका पालन कई परिवारों में किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है, जिसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है। इसी धारणा के चलते गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के भीतर रहने और ग्रहण की छाया से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, ग्रहण के समय चाकू, कैंची, सुई या किसी भी प्रकार की नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसी वस्तुओं का प्रयोग करने से शिशु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए सिलाई-कढ़ाई या काटने-छांटने जैसे कार्यों से दूर रहने को कहा जाता है।
ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और सावधानियां
ग्रहण के दौरान खान-पान को लेकर भी कई तरह के नियम बताए गए हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण शुरू होने से पहले भोजन कर लेना चाहिए और ग्रहण काल के दौरान भोजन करने से बचना चाहिए। हालांकि, गर्भवती महिलाओं के मामले में परिवारों की अपनी-अपनी परंपराएं होती हैं; कुछ लोग उनके लिए भोजन-पानी की व्यवस्था रखते हैं, जबकि कुछ परिवार कड़ाई से नियमों का पालन करते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके घर की शुद्धि करने और फिर भोजन करने की परंपरा है।सोने को लेकर भी अलग-अलग मत हैं। कई परिवारों में यह माना जाता है कि ग्रहण के दौरान सोने के बजाय भगवान का स्मरण, मंत्र जाप या धार्मिक पाठ करना अधिक शुभ होता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना, घर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धि करना और दान-पुण्य करना भी धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा माना गया है।
भारत में सूतक काल की स्थिति
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 28 अगस्त 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से, जब कोई ग्रहण किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में दृश्यमान नहीं होता, तो वहां उसका सूतक काल (ग्रहण से पहले का निषेध समय) भी मान्य नहीं होता है।चूंकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां के निवासियों पर ग्रहण से जुड़े धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। रक्षाबंधन के पर्व पर भी इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं माना जाएगा। अतः, भारत में रहने वाले लोगों के लिए ग्रहण से संबंधित सूतक या अन्य धार्मिक नियमों का पालन करना आवश्यक नहीं है।
