Tulsi Puja Rules: भारत के ज्यादातर घरों में तुलसी का पौधा आसानी से देखने को मिल जाता है। तुलसी का पौधा बेहद पवित्र माना जाता है। घर के आंगन या बालकनी में तुलसी का पौधा रखना और रोज इसकी पूजा करना सदियों पुरानी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में तुलसी को देवी तुलसी का स्वरूप माना गया है और इसका संबंध भगवान विष्णु से भी बताया जाता है। तुलसी को लेकर कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है। आखिर ऐसा क्यों है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
तुलसी को माना जाता है बेहद पवित्र
हिंदू धर्म में तुलसी को पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। कई घरों में सुबह तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाया जाता है और पूजा की जाती है। भगवान विष्णु की पूजा में भी तुलसी दल का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि घर में तुलसी का पौधा होने से सकारात्मक माहौल बना रहता है। इसलिए इसके साथ भी सामान्य पौधों की तरह व्यवहार नहीं किया जाता। तुलसी के पत्ते तोड़ने से लेकर उसमें पानी देने तक के लिए कुछ परंपरागत नियम बताए गए हैं।
सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते क्यों नहीं तोड़ते?
मान्यता के अनुसार सूर्यास्त के बाद तुलसी के पौधे को छूना या उसके पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना जाता। इसके पीछे धार्मिक सोच यह है कि शाम के बाद तुलसी माता विश्राम करती हैं। इसी वजह से सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि तुलसी का इस्तेमाल पूजा के लिए करना हो तो दिन के समय ही इसके पत्ते ले लेने चाहिए।
रविवार को तुलसी में पानी देने की भी है मनाही
रविवार का दिन भी तुलसी से जुड़े खास नियमों में शामिल है। कई हिंदू परिवारों में रविवार को तुलसी में पानी नहीं दिया जाता और इसके पत्ते भी नहीं तोड़े जाते। धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवार को देवी तुलसी भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे को छेड़ने से बचने की परंपरा है। यही कारण है कि घर के बड़े अक्सर कहते हैं कि रविवार को तुलसी को न तोड़ें, न ही उसमें पानी डालें।
बिना स्नान किए तुलसी को छूने से क्यों बचते हैं?
तुलसी को पवित्र पौधा माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा से पहले शरीर और मन की शुद्धता पर जोर दिया जाता है। इसी वजह से बिना स्नान किए तुलसी को छूने या उसके पत्ते तोड़ने से बचने की परंपरा है। सुबह स्नान करने के बाद तुलसी को जल देना, दीपक जलाना और पूजा करना कई घरों की रोजाना की परंपरा है। इसका उद्देश्य तुलसी के प्रति सम्मान और श्रद्धा बनाए रखना है।
तुलसी के पत्ते तोड़ते समय इन बातों का रखें ध्यान
तुलसी के प्रति सम्मान रखना इस पूरी परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर पूजा के लिए तुलसी के पत्ते लेने हैं तो सुबह का समय बेहतर माना जाता है। पत्ते तोड़ते समय पौधे को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखना चाहिए। एक साथ बहुत सारे पत्ते तोड़ने के बजाय जरूरत के अनुसार ही पत्ते लेना अच्छा माना जाता है।
