वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का गोचर (एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश) अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में, 23 अक्टूबर 2026 को चंद्रमा ने कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश किया है। मीन राशि में पहले से ही शनि देव विराजमान हैं, जिसके कारण अब यहाँ शनि और चंद्रमा की युति बन गई है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस विशेष युति को 'विष योग' के रूप में देखा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में विष योग को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति माना गया है। जब शनि और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं, तो यह स्थिति मानसिक और व्यावहारिक स्तर पर विशेष सावधानी बरतने का संकेत देती है। अगले तीन दिनों तक यह युति मीन राशि में प्रभावी रहेगी, जिसका प्रभाव सभी राशियों के जातकों के जीवन पर पड़ सकता है।
विष योग का प्रभाव और सावधानी
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, विष योग के दौरान व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार या असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। शनि को अनुशासन और कर्म का कारक माना गया है, जबकि चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दोनों के मिलन से उत्पन्न होने वाला यह योग स्वभाव में गंभीरता और कभी-कभी मानसिक तनाव का कारण बन सकता है।अगले तीन दिनों तक के लिए ज्योतिष विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस दौरान धैर्य बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले पूरी तरह सोच-विचार कर लें और जल्दबाजी में कोई भी कदम न उठाएं। इस अवधि में मन को शांत रखने के लिए ध्यान या आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताना लाभकारी माना जाता है।
क्या है इस गोचर की धार्मिक मान्यता?
हिंदू पंचांग के अनुसार, चंद्रमा का गोचर हर सवा दो दिन में होता है, लेकिन जब यह शनि जैसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह के साथ युति करता है, तो इसका प्रभाव अधिक समय तक महसूस किया जाता है। मीन राशि में शनि का गोचर पहले से ही चल रहा है, और अब चंद्रमा के आने से यह स्थिति और अधिक सक्रिय हो गई है।धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, इस समय के दौरान अपने इष्ट देव की आराधना करना और सात्विक जीवनशैली का पालन करना शुभ माना जाता है। यह समय आत्म-चिंतन और अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के लिए उपयुक्त माना गया है। अगले तीन दिनों तक चंद्रमा के मीन राशि में रहने के दौरान, जातकों को अपने स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
