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Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा की रात पृथ्वी पर क्यों आती हैं मां लक्ष्मी? जानें कोजागरी व्रत की पौराणिक कथा

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने क्यों आती हैं। जानें कोजागरी पूर्णिमा का धार्मिक महत्व, रात्रि जागरण की परंपरा और साहूकार की दो बेटियों से जुड़ी रोचक पौराणिक कथा।

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Sharad Purnima 2026

Sharad Purnima 2026: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा की रात को बेहद खास और पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करने निकलती हैं और घर-घर जाकर देखती हैं कि कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है। इसी दौरान माता के मुख से एक सवाल निकलता है - ‘को जागर्ति?’ यानी ‘कौन जाग रहा है?’ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस रात जागकर मां लक्ष्मी का स्मरण, पूजन और भजन-कीर्तन करते हैं, उन्हें देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा (Kojagari Purnima) भी कहा जाता है। लेकिन इस परंपरा के पीछे एक रोचक पौराणिक कथा भी जुड़ी है, जो व्रत, श्रद्धा और रात्रि जागरण के महत्व को समझाती है।

शरद पूर्णिमा को क्यों कहा जाता है कोजागरी पूर्णिमा?

शरद पूर्णिमा को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा जैसे नामों से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस रात का संबंध मां लक्ष्मी की आराधना और चंद्रमा की शीतल चांदनी से जोड़ा जाता है। ‘कोजागरी’ शब्द संस्कृत के ‘को जागर्ति’ से बना है, जिसका अर्थ है - ‘कौन जाग रहा है?’ लोकमान्यता के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी उन भक्तों पर प्रसन्न होती हैं, जो जागकर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इसी विश्वास के चलते कई परिवारों में रातभर जागने, मंत्र जाप करने और भजन-कीर्तन की परंपरा निभाई जाती है।