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Ashtavakra Gita: ज्ञानी व्यक्ति को पुण्य-पाप क्यों नहीं बांधते? अष्टावक्र गीता के ये श्लोक देंगे जवाब

Ashtavakra Gita Hindi: अष्टावक्र गीता के इन श्लोकों में राजा जनक ने बताया है कि आत्मज्ञान का अर्थ संसार छोड़ना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए मोह, इच्छा, अहंकार और भय से मुक्त हो जाना है।

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अष्टावक्र गीता के श्लोक

Ashtavakra Gita Hindi: भारतीय दर्शन के प्रमुख ग्रंथों में से एक अष्टावक्र गीता (Ashtavakra Gita) में राजा जनक और ऋषि अष्टावक्र के बीच संवाद के जरिए जीवन के कई बड़े सवालों के जवाब मिलते हैं। अष्टावक्र गीता की अपनी इस सीरीज के दसवें भाग में आज हम आपको श्लोक 60 से श्लोक 65 तक के अर्थों का सार बता रहे हैं। अष्टावक्र गीता के इन श्लोकों में राजा जनक कह रहे हैं कि आत्मज्ञान का अर्थ संसार छोड़ना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए मोह, इच्छा, अहंकार और भय से मुक्त हो जाना है।

श्लोक 60- हंतात्मज्ञस्य धीरस्य खेलतो भोगलीलया।