धर्म

कुछ मिनट का मौन और भीतर की ओर सफर, जानें ध्यानलिंग का रहस्य

Dhyanalinga Temple: कोयंबटूर की वेल्लियांगिरी पहाड़ियों के पास स्थित ध्यानलिंग एक ऐसी जगह है जहां कुछ कहने की नहीं, बस चुप बैठने की जरूरत है।

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ध्यानलिंग का रहस्य (फोटो: Pinterest)

Dhyanalinga Temple: कोयंबटूर की वेल्लियांगिरी पहाड़ियों के पास स्थित ध्यानलिंग को ऐसी जगह के तौर पर देखा जाता है, जहां पहुंचकर आपको किसी खास पूजा-पाठ या धार्मिक नियम का पालन नहीं करना पड़ता। मौन और ध्यान को यहां सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। 24 जून 1999 को ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने ध्यानलिंग को समर्पित किया था। ध्यानलिंग की खासियत यही है कि यह किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है। अलग-अलग विचारों और धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग यहां आते हैं और कुछ समय शांत बैठते हैं।

ध्यानलिंग में क्यों रखा जाता है इतना मौन?

काम का दबाव और रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच हमारी जिंदगी लगातार शोर-शराबे से घिरी हुई है। लोगों के लिए कुछ पल भी चुपचाप बैठना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से ध्यानलिंग में मौन को खास जगह दी गई है। यहां पूजा, आरती या किसी तरह के कर्मकांड की व्यवस्था नहीं है। आने वाले लोगों को कुछ समय शांत बैठने और अपने भीतर ध्यान लगाने का अवसर मिलता है। यही वजह है कि इसे सामान्य मंदिर से थोड़ा अलग अनुभव वाला स्थान माना जाता है।