Ashtavakra Gita Hindi: भारतीय दर्शन के प्रमुख ग्रंथों में से एक अष्टावक्र गीता (Ashtavakra Gita) में राजा जनक और ऋषि अष्टावक्र के बीच संवाद के जरिए जीवन के कई बड़े सवालों के जवाब मिलते हैं। अष्टावक्र गीता की अपनी इस सीरीज के 12वें भाग में आज हम आपको श्लोक 74 से श्लोक 78 तक के अर्थों का सार बता रहे हैं। अष्टावक्र गीता के इन श्लोकों में राजा जनक आत्मज्ञान की स्थिति को बहुत गहराई से समझाते हैं।
मय्यनन्तमहाम्भोधौ विश्वपोत इतस्ततः।
भ्रमति स्वान्तवातेन न ममास्त्यसहिष्णुता।। 74।।
राजा जनक कह रहे हैं, 'मैं अनंत महासागर के समान हूं और यह संसार एक नाव की तरह मेरे भीतर इधर-उधर घूम रहा है। लेकिन यह सब मन रूपी हवा के कारण हो रहा है। इसलिए मुझे किसी तरह की बेचैनी या असहिष्णुता नहीं है।'
मय्यनन्तमहाम्भोधौ जगद्वीचिः स्वभावतः।
उदेतु वास्तमायातु न मे वृद्धिर्न न क्षतिः।। 75।।
राजा जनक कह रहे हैं, 'मैं अनंत महासागर के समान हूं और संसार रूपी लहरें अपने स्वभाव से उठती और फिर शांत हो जाती हैं। उनके उठने या मिटने से मुझमें न कोई वृद्धि होती है और न कोई कमी।'
मय्यनन्तमहाम्भोधौ विश्वं नाम विकल्पना।
अतिशान्तो निराकार एतदेवाहमास्थितः।। 76।।
राजा जनक कह रहे हैं, 'मैं अनंत महासागर के समान हूं और यह पूरा संसार केवल एक कल्पना या विचार के रूप में मेरे भीतर दिखाई देता है। मैं अत्यंत शांत, निराकार और स्थिर हूं। इसी अवस्था में मैं स्थित हूं।'
नात्मा भावेषु नो भावस्तत्रानन्ते निरंजने।
इत्यसक्तोऽस्पृहः शान्त एतदेवाहमास्थिताः।। 77।।
राजा जनक कह रहे हैं, 'आत्मा किसी वस्तु या भाव में नहीं है और कोई भी वस्तु उस अनंत, निर्मल आत्मा में वास्तव में बंधी हुई नहीं है। इस सत्य को जानकर मैं आसक्ति और इच्छाओं से मुक्त होकर शांत अवस्था में स्थित हूं।'
अहो चिन्मात्रमेवाह मिन्द्रजालोपमं जगत्।
अतो मम कथं कुत्र हेयोपादेयकल्पना।। 78।।
राजा जनक कह रहे हैं, 'अहो! यह पूरा संसार केवल चेतना मात्र में दिखाई देने वाला इंद्रजाल अर्थात जादू जैसा है। इसलिए मेरे लिए अब यह तय करने की कोई आवश्यकता नहीं कि क्या छोड़ना है और क्या अपनाना है।'
इन पांचों श्लोकों का सार
जनक का संदेश है कि हम अपनी परिस्थितियां नहीं हैं। हमारा वास्तविक स्वरूप उनसे कहीं अधिक विशाल और शांत है। जब व्यक्ति इस बात को अनुभव करने लगता है, तब आसक्ति, इच्छा, भय और पाना-खोना जैसी मानसिक उलझनें धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती हैं।
