धर्म

सुख-दुख की लहरों से ऊपर कैसे उठें? अष्टावक्र गीता में जनक का जवाब

Ashtavakra Gita Hindi: अष्टावक्र गीता के इन श्लोकों में राजा जनक आत्मज्ञान की स्थिति को बहुत गहराई से समझाते हैं। इन शब्दों में आत्मज्ञान का रहस्य छिपा है।

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अष्टावक्र गीता के श्लोक (फोटो: Pinterest)

Ashtavakra Gita Hindi: भारतीय दर्शन के प्रमुख ग्रंथों में से एक अष्टावक्र गीता (Ashtavakra Gita) में राजा जनक और ऋषि अष्टावक्र के बीच संवाद के जरिए जीवन के कई बड़े सवालों के जवाब मिलते हैं। अष्टावक्र गीता की अपनी इस सीरीज के 12वें भाग में आज हम आपको श्लोक 74 से श्लोक 78 तक के अर्थों का सार बता रहे हैं। अष्टावक्र गीता के इन श्लोकों में राजा जनक आत्मज्ञान की स्थिति को बहुत गहराई से समझाते हैं।

मय्यनन्तमहाम्भोधौ विश्वपोत इतस्ततः।