धर्म

अष्टावक्र ने जनक को बताया जीवन का सबसे बड़ा सत्य, यह श्लोक देता है बड़ा ज्ञान

Ashtavakra Gita Hindi: अष्टावक्र गीता के इन श्लोकों में अष्टावक्र और राजा जनक के बीच आत्मज्ञान, संसार की वास्तविकता और त्याग की गहरी बात कही गई है।

Image

अष्टावक्र गीता के श्लोक (फोटो: pinterest)

Ashtavakra Gita Hindi: भारतीय दर्शन के प्रमुख ग्रंथों में से एक अष्टावक्र गीता (Ashtavakra Gita) में राजा जनक और ऋषि अष्टावक्र के बीच संवाद के जरिए जीवन के कई बड़े सवालों के जवाब मिलते हैं। अष्टावक्र गीता की अपनी इस सीरीज के 11वें भाग में आज हम आपको श्लोक 66 से श्लोक 73 तक के अर्थों का सार बता रहे हैं। अष्टावक्र गीता के इन श्लोकों में अष्टावक्र और राजा जनक के बीच आत्मज्ञान, संसार की वास्तविकता और त्याग की गहरी बात कही गई है।

न ते संगोऽस्ति केनापि किं शुद्धस्त्यक्तुमिच्छसि।