Dhanvantari Temples: हिंदू धर्म में धनतेरस पर्व का खास महत्व है। धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। मान्यता है कि उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। इसी वजह से धनतेरस पर बर्तन और पीली धातु खरीदने की परंपरा शुरू हुई। कहा जाता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस आर्टिकल के माध्यम से आप जानेंगे भारत में स्थित भगवान धन्वंतरि के 5 प्रसिद्ध मंदिर के बारे में जहां धनतेरस पर खास पूजा होती है।
1- पेरिंगावु श्री धन्वंतरि मंदिर: केरल के त्रिशूर जिले के पेरिंगावु गांव में पेरिंगावु श्री धन्वंतरि मंदिर स्थित है। मंदिर की मान्यता 900 साल से भी अधिक पुरानी बताई जाती है। धन्वंतरि जयंती के मौके पर यहां खास पूजा का आयोजन होता है।
2- थोट्टुवा धन्वंतरि मंदिर: पेरुंबवूर-कोडनाड मार्ग पर थोट्टुवा जंक्शन से करीब एक किलोमीटर दूर थोट्टुवा धन्वंतरि मंदिर स्थित है। यहां भगवान धन्वंतरि की लगभग 6 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है।
3- श्री धन्वंतरि मंदिर, पल्लुरुथी, कोच्चि: केरल के कोच्चि में पल्लुरुथी में श्री धन्वंतरि मंदिर स्थित है। इस मंदिर को भगवान धन्वंतरि को समर्पित राज्य के पुराने मंदिरों में गिना जाता है।
4- मरुत्तोरवट्टम धन्वंतरि मंदिर, केरल: केरल के अलप्पुझा जिले के चेरथला में मरुत्तोरवट्टम में यह मंदिर स्थित है। यहां भगवान को अमृत कलश और औषधियों से जुड़े स्वरूप में पूजा जाता है।
5- रंगनाथस्वामी मंदिर: तमिलनाडु के श्रीरंगम में स्थित रंगनाथस्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यहां मां लक्ष्मी की भी पूजा होती है। खास बात यह है कि धनतेरस पर मंदिर में भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। इस दौरान जड़ी-बूटियों से तैयार प्रसाद भी भगवान को अर्पित किया जाता है।
धनतेरस का पर जरूर करें ये काम
धनतेरस के दिन कुछ खास चीजें करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन पूजा में भगवान धन्वंतरि को धनिया जरूर चढ़ाना चाहिए। पूजा के बाद धनिया के कुछ बीज संभालकर रख लें और दिवाली के बाद इन्हें घर के बगीचे या गमले में बो दें। इसके अलावा धनतेरस पर सोना, चांदी या पीली धातु और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करते समय सात अनाज यानी गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर भी शामिल करें। भगवान धन्वंतरि के साथ मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करना न भूलें। दिवाली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी और गणेश जी की नई प्रतिमाएं भी खरीद सकते हैं। इस दिन नया झाड़ू घर लाने की भी परंपरा है। शाम को प्रदोष काल में घाट, गौशाला, कुएं, बावड़ी और मंदिरों में दीपक जलाने का विशेष महत्व माना जाता है।
