Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली सिर्फ दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा और उनके नाम से दीपदान करने की भी खास परंपरा है। आपने भी घर में 14 दीये जलते देखे होंगे, लेकिन क्या कभी सोचा है कि आखिर इनकी संख्या 14 ही क्यों होती है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमराज के 14 नामों का स्मरण करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। आइए जानते हैं यमराज के ये 14 नाम कौन से हैं और इनका क्या महत्व है।
यमराज के 14 नाम कौन से हैं
पंडित रमाशंकर उपाध्याय के अनुसार, यमराज को केवल मृत्यु का देवता नहीं, बल्कि मनुष्य के कर्मों का हिसाब रखने वाला और न्याय करने वाला देवता भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उनके 14 नाम बताए गए हैं। ये नाम उनके अलग-अलग गुणों और कार्यों को दर्शाते हैं।
1. यम: जीवन और मृत्यु का विधान चलाने वाले।
2. धर्मराज: अच्छे-बुरे कर्मों के आधार पर न्याय करने वाले।
3. मृत्यु: जीवन का अंत करने वाले देवता।
4. अन्तक: जीवन की अंतिम सीमा तय करने वाले।
5. वैवस्वत: सूर्यदेव विवस्वान के पुत्र।
6. काल: समय और मृत्यु के अधिपति।
7. सर्वभूतक्षय: सभी प्राणियों के जीवन का अंत करने वाले।
8. औदुम्बर: यमराज का एक विशेष नाम।
9. दध्न: यमराज के नामों में शामिल एक स्वरूप।
10. नील: यमराज का एक अन्य नाम।
11. परमेष्ठी: सर्वोच्च पद पर विराजमान।
12. वृकोदर: यमराज का विशेष नाम।
13. चित्र: कर्मों के लेखे-जोखे से जुड़ा नाम।
14. चित्रगुप्त: मनुष्यों के कर्मों का लेखा रखने वाले।
नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाते हैं 14 दीये?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। माना जाता है कि इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमदेव के निमित्त दीपक जलाना शुभ होता है। इसके पीछे परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना जुड़ी है। दीपक का प्रकाश जीवन से अंधकार और नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है।
भक्ति टाइम्स पर यह भी पढ़ें: दिवाली पर लक्ष्मी पूजन में कौड़ी, कमल गट्टा और गोमती चक्र क्यों रखे जाते हैं? जानें इनका धार्मिक महत्व
क्या 14 नामों के लिए 14 अलग-अलग दीये जलाने चाहिए
नहीं, इन दोनों परंपराओं को एक समझना सही नहीं होगा। नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाने की परंपरा अलग है, जबकि यमराज के 14 नामों का तीन-तीन बार उच्चारण करके जल से तर्पण करने का विधान भी बताया गया है। द्रिक पंचांग में भी इसका उल्लेख मिलता है। हालांकि, पूजा-पाठ की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करना चाहिए। इन सभी परंपराओं का मूल भाव यमराज से परिवार की रक्षा, अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना करना है।
