Jaharveer Goga Ji Maharaj Kaun The: गोगाजी महाराज को उत्तर भारत के एक प्रसिद्ध लोक देवता के रूप में जाना जाता है, जिन्हें जाहरवीर गोगाजी, गुग्गा पीर और सांपों के देवता के रूप में भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को वीर गोगाजी का जन्म हुआ था। उनकी स्मृति में हर साल इस तिथि पर गोगा नवमी का पर्व मनाया जाता है। साल 2026 में आज 5 सितंबर को गोगा नवमी मनाई जा रही है। मान्यता है कि इस दिन गोगाजी की पूजा करने से सांप के काटने का भय नहीं रहता है। इसी के साथ महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, परिवार वालों के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-शांति के लिए व्रत रखती हैं तथा गोगाजी की आराधना करती हैं। आइए अब जानें गोगाजी महाराज के जीवन से जुड़ी खास बातों के बारे में।
गोगाजी ने अनेक विद्याएं की थीं सिद्ध
राजस्थान के चुरू जिले के ददरेवा गांव में चौहान राजपूत वंश के राजा के घर गोगाजी का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम जेवर सिंह और माता रानी बाछल कंवर थीं। गोगाजी ने अपने गुरु गोरखनाथ जी के मार्गदर्शन में बहुत ही कम उम्र में अनेक विद्याएं सिद्ध कर ली थीं। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी दिव्य ऊर्जा और कृपा से कई लोगों को उनकी परेशानियों से मुक्त किया है। उनके पास भूत-प्रेत, बुरी आत्माओं और तंत्र-मंत्र के प्रभावों को कम करने के अचूक उपाय थे। इसी के साथ उनकी शक्ति सांप के काटने या विषैले जीवों के प्रभाव को कम करने में मदद करती थी। इसी वजह से उन्हें सांपों का देवता कहा जाने लगा।
तीनों धर्म में पूजे जाते हैं बाबा
बता दें कि गोगाजी महाराज की पूजा हिंदू, मुस्लिम और सिख तीनों धर्मों में की जाती है। हिंदू धर्म के लोग गोगाजी महाराज को सांपों के देवता और वीर योद्धा के रूप में पूजते हैं। मुस्लिम समुदाय में बाबा को गोगा पीर या जाहर पीर का स्थान प्राप्त है। जाहर पीर का अर्थ होता है 'साक्षात प्रकट होने वाला पीर या देवता।' विशेषकर कायमखानी और चायल जाति के मुसलमान बाबा को लोक देवता का रूप मानते हैं। वहीं, सिख समुदाय के लोग भी बाबा की वीरता और लोक कल्याणकारी स्वरूप को याद करते हैं।
इस जगह गिरा था गोगाजी का धड़
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में जाहरवीर गोगाजी का मुख्य और प्रसिद्ध धाम 'गोगामेड़ी' स्थित है, जिसे 'धड़ मेड़ी' के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां गोगाजी महाराज का धड़ गिरा था। बता दें कि भक्तों के लिए बाबा का ये मंदिर हर दिन खुला रहता है। यहां रोजाना सुबह-शाम गोगा महाराज की पूजा की जाती है। इसके अलावा भाद्रपद माह में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होने के लिए भक्तजन दूर-दूर से आते हैं।
