Buddha Teachings: हमारा मन बहुत चंचल होता है। कभी हम बीती हुई बातों को सोचकर परेशान होते हैं, तो कभी आने वाले कल की चिंता में उलझे रहते हैं। कई बार हम कुछ और करना चाहते हैं, लेकिन हमारा मन कहीं और भटकने लगता है। ऐसे में मन को शांत रखना और अपने विचारों पर काबू पाना आसान नहीं होता। भगवान बुद्ध ने भी मन की इसी प्रकृति को समझाया है। धम्मपद में दिए गए उनके उपदेश बताते हैं कि मन को साधना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। जिस तरह एक तीर बनाने वाला कारीगर टेढ़े तीर को सीधा करता है, उसी तरह समझदार व्यक्ति अपने मन को भी सही दिशा दे सकता है। बुद्ध के अनुसार, जो इंसान अपने मन को नियंत्रित करना सीख लेता है, वह जीवन में सच्चे सुख, शांति और मुक्ति का रास्ता खोज सकता है।
1- फन्दनं चपलं चित्तं दूरक्खं दुन्निवारयं।
उजुं करोति मेधावी उसुकारो’व तेजनं।।
हिंदी अर्थ: मन बहुत चंचल और बेचैन होता है। इसे संभालना और काबू में रखना आसान नहीं है। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति अपने मन को उसी तरह सीधा और स्थिर कर लेता है, जैसे एक तीर बनाने वाला कारीगर टेढ़े तीर को सीधा करता है।
2- वारिजो व थले खित्तो ओकमोकत-उब्भतो।
परिफन्दतिदं चित्तं मारधेय्यं पहातवे।।
हिंदी अर्थ: जैसे पानी से बाहर निकाली गई मछली जमीन पर तड़पती है, वैसे ही मन भी बेचैन रहता है। यह मन माया और बुरे विचारों के बंधन से बाहर निकलने के लिए छटपटाता रहता है।
3- दुन्निग्गहस्स लहुनो यत्थकाम निपातिनो।
चित्तस्स दमथो साधु चित्तं दन्तं सुखावहं।।
हिंदी अर्थ: मन को काबू में करना बहुत कठिन है। यह बहुत तेजी से इधर-उधर भागता है और जहां चाहता है, वहीं पहुंच जाता है। इसलिए मन को वश में रखना अच्छी बात है, क्योंकि नियंत्रित मन जीवन में सुख और शांति लेकर आता है।
4- दूरङ्गम एकचरं असरीरं गुहासयं।
ये चित्तं सञ्ञमेस्सन्ति मोक्खन्ति मारबन्धना।।
हिंदी अर्थ: मन बहुत दूर तक जाने वाला, अकेले विचरण करने वाला, शरीर से रहित और हृदय रूपी गुफा में रहने वाला है। जो लोग अपने मन को अच्छी तरह नियंत्रित कर लेते हैं, वे मोह और बंधनों से मुक्त हो जाते हैं।
