Janmashtami 2026: जन्माष्टमी के पावन पर्व पर कहीं लड्डू गोपाल के लिए नई पोशाक आती है तो कहीं उनके झूले को सजाया जाता है। गौर करने वाली बात ये है कि भक्त इस दिन पूजा-पाठ के साथ ही अपने पहनावे का भी खास ध्यान रखते हैं। जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) पर पीले रंग के कपड़े पहनने की परंपरा काफी लोकप्रिय है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर कान्हा के वस्त्रों का रंग पीला ही क्यों माना जाता है और इस दिन ज्यादातर भक्त पीले कपड़े क्यों पहनते हैं? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और क्या है इसका महत्व।
भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा जताने का तरीका
पीताम्बर दो शब्दों से मिलकर बना है- 'पीत' यानी पीला और 'अम्बर' यानी वस्त्र। इसलिए पीताम्बर का अर्थ हुआ पीले रंग के वस्त्र धारण करने वाला। भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीरों और मूर्तियों में अक्सर उन्हें पीली धोती या पीले वस्त्र पहने हुए दिखाया जाता है। इसी वजह से उन्हें पीताम्बरधारी भी कहा जाता है। जन्माष्टमी पर भक्त भगवान कृष्ण को पीले वस्त्र पहनाते हैं और खुद भी पीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा करते हैं। इसे भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा जताने का एक तरीका माना जाता है।
श्रीकृष्ण से जुड़ा है पीला रंग
हिंदू धार्मिक परंपराओं में पीले रंग को काफी शुभ माना गया है। भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और विष्णु जी के स्वरूप में भी पीले वस्त्रों का विशेष उल्लेख मिलता है। पीला रंग प्रकृति में प्रकाश और ऊर्जा का एहसास भी कराता है। यही वजह है कि पूजा और धार्मिक आयोजनों में पीले रंग के कपड़े, फूल और दूसरी चीजों का इस्तेमाल देखने को मिलता है। यह रंग ज्ञान, सकारात्मकता, पवित्रता और आध्यात्मिकता से जोड़ा जाता है।
जन्माष्टमी पर पीले कपड़े पहनने की मान्यता
मान्यता है कि जन्माष्टमी के पावन दिन भगवान कृष्ण के प्रिय रंग को पहनकर उनकी पूजा करने से भक्त का मन भगवान के प्रति भक्ति में अधिक जुड़ता है। इसके अलावा जन्माष्टमी के मौके पर कृष्ण से जुड़े दूसरे रंगों को भी पसंद किया जाता है। नीला रंग भगवान कृष्ण की विशालता और दिव्यता से जोड़ा जाता है। वहीं हरा रंग वृंदावन की हरियाली और प्रकृति की याद दिलाता है।
जन्माष्टमी पर पीताम्बर पहनने का असली संदेश
कृष्ण जन्माष्टमी पर पीला रंग पहनने की परंपरा को केवल कपड़ों तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। इसके पीछे भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम, श्रद्धा और उनकी शिक्षाओं को जीवन में उतारने की भावना भी जुड़ी है। इस दिन अगर आप पीले कपड़े पहनकर कान्हा की पूजा करते हैं तो इसे अपनी आस्था के प्रतीक के रूप में देख सकते हैं।
