Janmashtami 2026 Today: आज 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ देशभर में मनाया जा रहा है। इस दिन भक्तजन लड्डू गोपाल की विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण जी का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि यानी रात 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी कारण से हर साल जन्माष्टमी की रात 12 बजे खीरे को माता देवकी के गर्भ का प्रतीक मानकर सिक्के से काटा जाता है, जो दर्शाता है कि श्रीकृष्ण ने गर्भ से बाहर आकर संसार में प्रवेश किया है। इसके बाद उन्हें पंचामृत से स्नान कराया जाता है। वस्त्र पहनाकर श्रृंगार किया जाता है, जिसके बाद विधि-विधान से पूजा होती है। साथ ही लड्डू गोपाल को झूला झुलाया जाता है।
चलिए जानते हैं छोटे बच्चों को ये पूरी परंपरा दिखानी चाहिए या नहीं और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत से जुड़े नियम क्या हैं।
छोटे बच्चों को रात 12 बजे जगाएं या सुलाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटे बच्चों को जगाकर रात 12 बजे कान्हा का जन्म दिखाना आवश्यक नहीं है। यदि वो जगे हुए हैं तो आप उन्हें कृष्ण जी के जन्म की पूजा दिखा सकते हैं। धर्म कभी भी बच्चों की सेहत या नींद की कीमत पर भगवान के किसी उत्सव में शामिल होने की जिद नहीं करता है। भगवान केवल भाव के भूखे होते हैं, इसलिए बच्चों को जबरदस्ती जगाना ठीक नहीं है। आप बच्चों को जन्माष्टमी के अगले दिन सुबह स्नान कराकर कान्हा के दर्शन करवा सकते हैं। यदि आप आधी रात को जबरदस्ती उन्हें जगाएंगे तो इससे उनकी नींद खराब होगी। ऐसे में चिड़चिड़े हो सकते हैं।
बच्चों को जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहिए या नहीं?
शास्त्रों में बताया गया है कि छोटे बच्चों को जन्माष्टमी का निर्जला उपवास रखने से बचना चाहिए। यदि जिद्द करके वो निर्जला व्रत रख भी लेते हैं और उसे पूरा नहीं कर पाते हैं तो उन्हें पाप लग सकता है। अगर बच्चा उपवास रखने की बहुत ज्यादा जिद्द करता है तो उसे फलाहार व्रत रखने दें, जिसमें दूध, फल, मखाना, अरबी की सब्जी, साबूदाना की खिचड़ी, ड्राई फ्रूट्स, समा के चावल, पनीर, मलाई और कुट्टू के आटे की पूड़ी जैसी चीजें खाई जा सकती हैं।
जन्माष्टमी पर कृष्ण जी को सबसे पहले क्या भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी की रात कृष्ण जी का श्रृंगार करने के बाद उन्हें सबसे पहले चरणामृत या पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी का भोग लगाएं। हालांकि, कुछ जगहों पर कृष्ण जी को सबसे पहले शहद की घुट्टी चटाने की परंपरा है। बता दें कि कृष्ण जी के प्रत्येक भोग में तुलसी का पत्ता होना चाहिए क्योंकि इसके बिना वो भोग स्वीकार नहीं करते हैं।
