Radhashtami 2026: राधाष्टमी का पर्व ब्रजभूमि में भगवान श्रीकृष्ण की आराध्या और प्रेम स्वरूपा राधारानी के जन्मोत्सव के रूप में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। खासतौर पर बरसाना में इस दिन का माहौल देखते ही बनता है। मान्यता है कि राधारानी का प्राकट्य बरसाना में हुआ था, इसलिए यहां स्थित श्री राधा रानी मंदिर (लाडली जी मंदिर) और मान मंदिर में राधाष्टमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। देशभर से श्रद्धालु राधारानी के दर्शन के लिए बरसाना पहुंचते हैं। आइए जानते हैं इस बार राधाअष्टमी पर राधा रानी मंदिर में पूजा का शुभ समय (Radha Ashtami Puja Muhurat) क्या रहेगा?
राधा रानी मंदिर में मध्याह्न पूजा का महत्व
राधाष्टमी पर राधारानी मंदिर में मध्याह्न पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। बरसाना के श्री राधा रानी मंदिर में राधाष्टमी पर मध्याह्न पूजा और दर्शन का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में भक्त राधारानी के जन्मोत्सव से जुड़े विशेष पूजन और दर्शन का लाभ ले सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राधारानी का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए राधाष्टमी के दिन दोपहर के आसपास होने वाली पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और भोग की परंपरा निभाई जाती है।
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लाडली जी के दर्शन के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु
बरसाना स्थित राधा रानी मंदिर को भक्त प्रेम से लाडली जी का मंदिर भी कहते हैं। राधाष्टमी पर यहां राधारानी का विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर परिसर और बरसाना की गलियों में उत्सव का वातावरण रहता है। भक्त राधे-राधे के जयकारों के साथ लाडली जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। राधाष्टमी के दिन मंदिर में दर्शन करने को भक्त बेहद पुण्यकारी मानते हैं। यही वजह है कि शुभ मुहूर्त के आसपास मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। बाहर से आने वाले भक्त दर्शन और पूजा के साथ बरसाना की अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा भी करते हैं।
मान मंदिर में भी होती है विशेष पूजा
राधाष्टमी पर बरसाना के मान मंदिर में भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था रहती है। ब्रज की राधा-कृष्ण परंपरा में मान मंदिर का अपना विशिष्ट धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। राधाष्टमी के अवसर पर यहां भी विशेष पूजन, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होते हैं। मान्यता है कि बरसाना की भूमि राधारानी की बाल लीलाओं और श्रीकृष्ण से जुड़ी अनेक दिव्य कथाओं की साक्षी रही है। इसलिए राधाष्टमी पर मान मंदिर पहुंचकर दर्शन करना भी भक्तों के लिए विशेष अनुभव माना जाता है।
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राधाष्टमी पर राधारानी की पूजा कैसे करें?
राधाष्टमी के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और राधारानी का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। घर पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पुष्प, फल, मिष्ठान और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जा सकती है। इसके बाद राधारानी के मंत्र और राधा-कृष्ण के भजनों का जाप करें।यदि संभव हो तो मध्याह्न के शुभ समय में राधारानी का पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है। बरसाना जाने वाले श्रद्धालु सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक के मुख्य पूजा-दर्शन मुहूर्त को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।
