Narak Chaturdashi Abhyang Snan 2026 Date & Time (narak chaturdashi abhyang snan time 2026, narak chaturdashi abhyang snan vidhi): देशभर में कल 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया गया, जिसके साथ ही दिवाली के 5 दिवसीय महापर्व की शुरुआत हो गई है। धनतेरस के बाद छोटी दिवाली का पर्व मनाया जाता है, जिसे नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। देश के कई राज्यों में नरक चतुर्दशी को नरक चौदस, काली चौदस, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी और भूत चतुर्दशी आदि नामों से जाना जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन प्रात: काल में अभ्यंग स्नान किया जाता है, जिससे कई लाभ होते हैं। आज यहां पर आप नरक चतुर्दशी के दिन किए जाने वाले अभ्यंग स्नान के मुहूर्त से लेकर विधि तक के बारे में जानेंगे।
नरक चतुर्दशी 2026 में कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस बार 7 नवंबर की सुबह 10 बजकर 47 मिनट से लेकर 8 नवंबर 2026 की सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी रहेगी। उदया तिथि की मानें तो कल 8 नवंबर 2026, रविवार को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। हालांकि, कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में आज 7 नवंबर को छोटी दिवाली यानी काली चौदस का पर्व मनाया जा रहा है।
नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान कब है?
नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान किया जाता है। अभ्यंग स्नान प्रात: काल में सूर्योदय से पहले होता है। आज 7 नवंबर को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू हो रही है, ऐसे में नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान आज 7 नवंबर को नहीं किया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान कल 8 नवंबर 2026 को करना ही शुभ रहेगा। बता दें कि कल 8 नवंबर को दिवाली का पर्व भी मनाया जाएगा।
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अभ्यंग स्नान का महत्व
पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अभ्यंग स्नान किया था, जिसके बाद से ये परंपरा आरंभ हो गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है और व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। साथ ही नजर दोष, खराब सेहत, तनाव और अकाल मृत्यु के भय से छुटकारा मिलता है।
नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, कल 8 नवंबर 2026 को सूर्योदय सुबह 06 बजकर 42 मिनट पर होगा, जबकि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में कल नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान मुहूर्त सुबह 05 बजकर 45 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 42 मिनट तक है।
अभ्यंग स्नान की विधि
कल नरक चतुर्दशी के दिन प्रात: काल में शरीर की तिल के तेल या सरसों के तेल से मालिश करें। तेल को सिर पर भी लगाया जा सकता है। तेल के बाद शरीर पर उबटन लगाएं, जिसे बेसन, चंदन, हल्दी और मुल्तानी मिट्टी को मिलाकर बनाया जाता है। जब उबटन सूख जाए तो हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें, जिसे अभ्यंग स्नान कहते हैं। स्नान के पानी में आप गंगाजल भी मिला सकते हैं। स्नान करने के पश्चात नए वस्त्र पहनें और भगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु तथा यमराज जी की पूजा करें। साथ ही यम के नाम का दीपक जलाएं।
