सनातन परंपरा में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या का विशेष महत्व है। भविष्य पुराण के अनुसार, नरक चतुर्दशी से लेकर दिवाली तक की अवधि सुख, समृद्धि और दरिद्रता के नाश के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर को इन दिनों के महत्व और अनुष्ठान की विधि के बारे में विस्तार से बताया था। मान्यता है कि इन तिथियों पर विशेष पूजा और दीपदान करने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में लक्ष्मी का वास होता है।
नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना अनिवार्य माना गया है। भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन अपामार्ग (चिचिड़ा) के पत्तों को अपने सिर के ऊपर से घुमाने की परंपरा है। इसके बाद यमराज और धर्मराज के विभिन्न नामों—यम, धर्मराज, मृत्यु, वैवस्वत, अंतक, काल और सर्वभूतक्षय का उच्चारण करते हुए तर्पण करना चाहिए। देवताओं की पूजा के पश्चात प्रदोष काल में शिव, विष्णु और ब्रह्मा जी के मंदिरों के साथ-साथ नदी तट, उद्यानों और मार्गों पर दीप प्रज्वलित करना शुभ फलदायी माना गया है।
दिवाली और दीपदान का धार्मिक महत्व
कार्तिक अमावस्या यानी दिवाली के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पितरों और देवताओं का पूजन करना चाहिए। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान-दक्षिणा देकर संतुष्ट करना विशेष पुण्यकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन घर को स्वच्छ रखकर तोरण, पुष्पमालाओं और बंदनवारों से सजाना चाहिए। शाम के समय दीपमालाएं प्रज्वलित करने से घर का वातावरण दोषरहित होता है और नकारात्मक शक्तियों का भय समाप्त होता है।भविष्य पुराण में उल्लेख है कि आधी रात के समय, जब घर के सभी सदस्य सो रहे हों, तब घर की स्त्रियों को सूप बजाते हुए पूरे घर में घूमना चाहिए। मान्यता है कि इस क्रिया से दरिद्रता यानी अलक्ष्मी का घर से निष्कासन होता है। इसके अलावा, नगर या घर के द्वार पर मार्गपाली (कुश और काश से बनी एक विशेष संरचना) बांधकर उसकी पूजा करने का भी विधान है। माना जाता है कि मार्गपाली के नीचे से गुजरने से वर्ष भर व्यक्ति निरोग और सुखी रहता है।
दिवाली के दिन राजा बलि की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। भूमि पर पांच रंगों से मंडल बनाकर राजा बलि और रानी विन्ध्यावली की मूर्ति स्थापित की जाती है। पुष्प, गंध, नैवेद्य और दीपों के साथ उनकी पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इन परंपराओं का पालन करते हुए, उत्सव के दौरान दान-पुण्य करना और समाज के सभी वर्गों को प्रसन्न रखना भविष्य पुराण के अनुसार कल्याणकारी माना गया है।
