दिवाली का त्योहार आते ही घर की साफ-सफाई, सजावट, मिठाइयों और मेहमानों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दौरान हम अपने परिवार और करीबियों का तो खूब ध्यान रखते हैं, लेकिन कई बार खुद की सेहत और मानसिक शांति को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि स्वस्थ शरीर और शांत मन के बिना त्योहार की खुशियों का पूरा आनंद लेना मुश्किल है। हिमालयन सिद्धा अक्षर, जिन्हें ग्रैंड मास्टर अक्षर के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार सेल्फ केयर यानी खुद की देखभाल कोई दिखावा या लग्जरी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा है। इस दिवाली आप भी अपने लिए रोजाना करीब 25 मिनट निकालकर ये 5 आसान योग और ध्यान अभ्यास कर सकते हैं।
1- हीलिंग वॉक
दिन की शुरुआत हल्की-फुल्की हीलिंग वॉक से की जा सकती है। हिमालयन सिद्धा अक्षर के अनुसार, इस अभ्यास में सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। अब दोनों हाथों को सिर के ऊपर सीधा उठाएं। कंधों पर हल्का खिंचाव महसूस करते हुए आरामदायक गति से 2 से 3 मिनट तक चलें।
इस अभ्यास से कंधों और शरीर के ऊपरी हिस्से को सक्रिय रखने, शरीर का तालमेल बेहतर बनाने और चलने-फिरने के दौरान अपनी मुद्रा पर ध्यान देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कंधे में चोट, चक्कर आने, संतुलन बनाने में परेशानी या दिल से जुड़ी समस्या होने पर इसे करने से बचें।
2- वज्रासन
वज्रासन योग का एक आसान और स्थिर आसन है। इसे करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाएं। दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलाएं और एड़ियों के बीच थोड़ी दूरी रखें। अब धीरे-धीरे कूल्हों को एड़ियों पर टिकाएं। अपनी कमर और गर्दन सीधी रखें और दोनों हथेलियों को घुटनों पर रख दें। इस स्थिति में 3 से 5 मिनट तक सामान्य रूप से सांस लें। हिमालयन सिद्धा अक्षर बताते हैं कि वज्रासन शरीर और मन को स्थिर रखने में मदद करता है। इसकी खास बात यह है कि इसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है। हालांकि, घुटनों या टखनों में चोट अथवा ज्यादा दर्द होने पर इसे न करें। जरूरत पड़ने पर नीचे मुलायम कंबल रख सकते हैं।
3- श्वास ध्यान
त्योहारों की भागदौड़ के बीच मन को शांत रखने के लिए श्वास ध्यान एक अच्छा अभ्यास हो सकता है। इसके लिए किसी शांत जगह पर आराम से बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। अब अपनी सांसों पर ध्यान दें। सांस को बदलने या नियंत्रित करने की कोशिश न करें। बस महसूस करें कि हवा नाक से अंदर आ रही है और बाहर जा रही है। अगर ध्यान भटकता है तो परेशान न हों, धीरे-धीरे दोबारा सांसों पर ध्यान लगाएं। हिमालयन सिद्धा अक्षर के अनुसार, रोजाना करीब 5 मिनट का यह अभ्यास मन को शांत करने और विचारों की भागदौड़ कम करने में मदद कर सकता है।
4- त्राटक
दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा है। ऐसे में दीपक के साथ त्राटक का अभ्यास भी किया जा सकता है। इसके लिए एक जलता हुआ दीपक अपनी आंखों के बराबर ऊंचाई पर और लगभग एक हाथ की दूरी पर रखें। आराम से बैठकर दीपक की लौ को देखें। अपनी आंखों पर जोर न डालें और जितनी देर सहज महसूस हो, उतनी देर ही लौ को देखें। इसके बाद आंखें बंद करके लौ की छवि को मन में महसूस करने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया को 2 से 3 बार दोहरा सकते हैं। हिमालयन सिद्धा अक्षर बताते हैं कि त्राटक मन को एक जगह केंद्रित करने का अभ्यास है। ग्लूकोमा, रेटिना से जुड़ी समस्या, आंखों में संक्रमण या मिर्गी होने पर लौ को देखकर त्राटक न करें।
5- विचार ध्यान
विचार ध्यान का मकसद मन में आने वाले विचारों को जबरदस्ती रोकना नहीं, बल्कि उन्हें समझना है। इसके लिए किसी शांत जगह पर बैठकर आंखें बंद कर लें। अब मन में आने वाले विचारों को बिना किसी फैसले के महसूस करें। उन्हें पकड़कर बैठने या उनसे परेशान होने की जरूरत नहीं है। कुछ मिनट बाद शांति, आभार या सकारात्मकता जैसे किसी एक अच्छे विचार पर ध्यान लगाएं। इस अभ्यास को 5 से 10 मिनट तक कर सकते हैं। हिमालयन सिद्धा अक्षर के मुताबिक, इससे व्यक्ति अपने विचारों और मन की आदतों को बेहतर तरीके से समझ सकता है।
