व्रत त्योहार

आश्विन शुक्ल प्रदोष व्रत विधि, कथा और महत्व

Ashwin Shukla Pradosh Vrat: आश्विन शुक्ल प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए खास माना जाता है। जानिए इस व्रत का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, कथा और पूजन सामग्री।

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Ashwin Shukla Pradosh Vrat katha

Ashwin Shukla Pradosh Vrat: भगवान शिव की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत को बेहद खास माना जाता है। हर महीने में दो बार प्रदोष व्रत पड़ता है। एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है। जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं इस व्रत का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, कथा और पूजन सामग्री।

आश्विन शुक्ल प्रदोष व्रत की पूजा कैसे करें?

प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर लें। चाहें तो मंदिर के पास रंगोली भी बना सकते हैं। इसके बाद उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके या अपने घर के मंदिर में भगवान शिव की पूजा करें। पूजा के दौरान- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इस दिन दुर्गा सप्तशती और शिवपुराण का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर कुश और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने से आरोग्य की कामना की जाती है। व्रत के दौरान फलाहार करें और शाम को भगवान शिव की आरती जरूर करें। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और फल दान करना अच्छा माना जाता है। अस्पताल में भर्ती गरीब मरीजों को फल बांटकर भी सेवा कर सकते हैं। मान्यता है कि प्रदोष व्रत पर बेल का पौधा लगाने से पुण्य मिलता है।