Kajari Teej 2026 Today: कजरी तीज का व्रत शिव जी और माता पार्वती को समर्पित है, जो हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। आमतौर पर ये व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, खुशहाल मैरिड लाइफ और परिवार वालों की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। इसके अलावा मनचाहा और योग्य वर पाने के लिए कुछ अविवाहित लड़कियां भी ये व्रत रखती हैं। तीज का ये व्रत निर्जला होता है, जिस दौरान शाम तक कुछ भी खाने और पीने की इजाजत नहीं होती है। शाम में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है, जिससे पहले नीम के पेड़ की विशेष रूप से पूजा की जाती है। चलिए अब जानें कजरी तीज 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र, नियम और व्रत के पारण का समय आदि के बारे में।
कजरी तीज 2026 की तिथि
- तृतीया तिथि प्रारम्भ- 30 अगस्त 2026 को सुबह 09:36 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त- 31 अगस्त 2026 को सुबह 08:50 बजे
कजरी तीज 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:29 बजे से 05:14 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:44 बजे से 07:06 बजे तक
- सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:44 बजे से 07:51 बजे तक
- अमृत काल: मध्य रात्रि 01:01 बजे से 02:36 बजे तक (1 सितंबर 2026)
- निशिता मुहूर्त: रात 11:59 बजे से मध्य रात्रि 12:44 बजे तक
कजरी तीज की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कार्य करके स्वच्छ हरे या लाल रंग के वस्त्र धारण करें। साथ ही सोलह श्रृंगार करें।
- पूजा स्थल की सफाई करके एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पूजा और व्रत का संकल्प लेने के बाद देवी-देवताओं को जल, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, फल, फूल, अक्षत, चंदन, सुहाग का सामान और वस्त्र अर्पित करें।
- पूजा सामग्री अर्पित करते समय मंत्र जाप करते रहें।
- घी का दीपक जलाने के बाद कजरी तीज व्रत की कथा पढ़ें।
- आरती करके पूजा का समापन करें।
- शाम के समय घर की उत्तर या पूर्व दिशा में नीम की एक टहनी (नीमड़ी) को प्रतीक रूप में स्थापित करें।
- नीम की टहनी पर गाय का दूध, पंचामृत, हल्दी, रोली, अक्षत, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, लाल चुनरी और वस्त्र अर्पित करें।
- साथ ही सत्तू, फल, चावल और गुड़ का भोग लगाएं।
- रात 8 बजकर 29 मिनट पर चंद्रमा का उदय होने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
कजरी तीज पर जपने वाले मंत्र
- ॐ शर्वाय नम:
- ॐ कपर्दिने नम:
- ॐ भैरवाय नम:
- ॐ ईशानाय नम:
- ॐ शूलपाणये नम:
- ॐ विश्वरूपिणे नम:
- ॐ विरूपाक्षाय नम:
कजरी तीज व्रत के नियम
संकल्प लेने के बाद ही पूजा और व्रत का आरंभ करें। संकल्प लेने के बाद व्रत को बीच में न तोड़ें। दिनभर बाल और नाखून न काटें। मन के साथ-साथ तन को भी दिनभर शुद्ध रखें। किसी भी व्यक्ति से कटु शब्द न बोलें और नकारात्मक चीजों से दूर रहें।
