हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्टूबर से हो चुकी है। शास्त्रों में इस पूरे महीने को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम माना गया है। इस दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के साथ-साथ खानपान और जीवनशैली से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना शुभ फलदायी माना जाता है।
कार्तिक के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाना और कुछ विशेष नियमों का पालन करना जातक के जीवन में सुख-समृद्धि ला सकता है। इस महीने में स्नान, दान और लक्ष्मीनारायण की पूजा का विशेष विधान है। यदि आप किसी पवित्र नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यकारी माना गया है।
कार्तिक मास में खानपान के नियम
धार्मिक मान्यताओं और स्वास्थ्य की दृष्टि से कार्तिक मास में कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। पंडितजी का कहना है कि इस महीने में तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिए। विशेष रूप से मछली का सेवन वर्जित माना गया है, क्योंकि मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु जल में अपने मत्स्य अवतार में होते हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य कारणों से बैंगन, करेला और दही का सेवन भी नहीं करना चाहिए। बैंगन को पित्त दोष बढ़ाने वाला और करेले को वातकारक माना गया है, जबकि दही का सेवन संतान के लिए उचित नहीं माना जाता है।
वहीं, कुछ चीजों का सेवन इस दौरान लाभदायक बताया गया है। कार्तिक में तिल का सेवन करना और भगवान विष्णु को तिल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, स्वास्थ्य की दृष्टि से मूली का सेवन करना उचित है, क्योंकि यह कफ और पित्त दोष को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। कार्तिक मास में आंवले का विशेष महत्व है, इसलिए इस दौरान आंवले का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।
दिनचर्या और पूजा के विशेष उपाय
खानपान के अलावा, कार्तिक मास में कुछ अन्य नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। इस पूरे महीने में मांस-मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाए रखनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दौरान शरीर पर तेल लगाना भी वर्जित है, केवल नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) के दिन ही तेल लगाने की छूट दी गई है। साथ ही, इस पवित्र अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन करना भी अनिवार्य माना गया है।
आध्यात्मिक लाभ के लिए इस महीने में दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, पीपल के वृक्ष और यमदेव के समीप दीपक जलाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अतिरिक्त, नदी या बहते जल के पास दीपक प्रज्वलित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इन सरल नियमों और उपायों का पालन कर भक्त इस पवित्र महीने का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं।
