करवा चौथ का त्योहार मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाता है। हालांकि, बदलते समय के साथ अब इस पर्व की परंपराओं में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। आज के दौर में कई पति भी अपनी पत्नी के प्रति सम्मान और प्रेम जताने के लिए उनके साथ करवा चौथ का व्रत रखते हैं। यदि आप भी इस व्रत को रखने का विचार कर रहे हैं, तो ज्योतिष एक्सपर्ट के अनुसार इसके नियमों को समझना आवश्यक है।
शास्त्रों के अनुसार, करवा चौथ का व्रत मुख्य रूप से महिलाओं के लिए बताया गया है, लेकिन पति अपनी इच्छा और श्रद्धा से इसे रख सकते हैं। नारद पुराण के पूर्वभाग के 113वें अध्याय में इस व्रत का उल्लेख मिलता है। यह कोई अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं है, बल्कि एक धार्मिक संकल्प है जिसे पति अपनी स्वेच्छा से ले सकते हैं। इसे दांपत्य जीवन के लिए शुभ माना जाता है।
व्रत के नियम और स्वास्थ्य का रखें ध्यान
करवा चौथ की पारंपरिक विधि में सूर्योदय से लेकर चंद्र दर्शन तक निर्जला (बिना जल के) रहने का विधान है। यदि पति भी व्रत रख रहे हैं, तो उनके लिए निर्जला रहना अनिवार्य नहीं है। ज्योतिष एक्सपर्ट का कहना है कि पति अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का स्वरूप तय कर सकते हैं। विशेष रूप से मधुमेह, किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे या नियमित दवा लेने वाले पतियों को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
व्रत की शुरुआत के संदर्भ में, जिस प्रकार महिलाएं सरगी (सूर्योदय से पहले का भोजन) ग्रहण करती हैं, उसी तरह पति भी सूर्योदय से पहले भोजन करके व्रत का संकल्प ले सकते हैं। हालांकि, पति के लिए सरगी की रस्म निभाना कोई शास्त्रीय अनिवार्यता नहीं है। इसी तरह, पूजा और कथा के दौरान पति अपनी पत्नी के साथ शामिल हो सकते हैं। नारद पुराण में गणेश पूजन का उल्लेख है, और परिवार के साथ मिलकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करना शुभ माना जाता है।
चंद्र दर्शन और व्रत खोलने की विधि
करवा चौथ में चंद्र दर्शन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। यदि पति ने व्रत रखा है, तो वे अपनी श्रद्धा के अनुसार स्वच्छ जल से चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं। ध्यान रहे कि चंद्रोदय का समय अलग-अलग शहरों में भिन्न होता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार ही समय का निर्धारण करें। व्रत खोलने की प्रक्रिया को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। पति-पत्नी साथ में पूजा और चंद्र दर्शन के बाद एक-दूसरे को जल या भोजन देकर व्रत खोल सकते हैं। कई परिवारों में पति द्वारा पत्नी को जल पिलाने की परंपरा है, और यदि पति ने भी व्रत रखा है, तो दोनों साथ में पारण (व्रत खोलना) कर सकते हैं। यह पूरी तरह से व्यक्तिगत श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं पर निर्भर करता है, क्योंकि ये रस्में अनिवार्य शास्त्रीय नियमों के अंतर्गत नहीं आती हैं।
