Karwa Chauth Vrat Today 2026: सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत बहुत ही खास होता है, जो वो अपने पति की लंबी उम्र और हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए रखती हैं। हालांकि, आज के समय में कुंवारी कन्याएं भी योग्य पति की चाह में करवा चौथ का व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस बार चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर की सुबह 01:06 बजे से रात 10:09 बजे तक रहेगी। ऐसे में आज 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को ही करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा जा रहा है। आज सुबह 3:30 बजे से सुबह 5:30 बजे तक सरगी लेने का समय था, जिसके बाद निर्जला व्रत सुबह 6:30 बजे से शुरू होगा।
यहां पर आप करवा चौथा व्रत की पूजा विधि, मंत्र, चंद्रोदय के समय और अन्य जरूरी बातों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त
आज करवा चौथ का व्रत सुबह 06:44 बजे से लेकर रात 08:18 बजे तक चलेगा। द्रिक पंचांग की मानें तो आज शाम में करवा चौथ की पूजा 05:44 बजे से 07:02 बजे के बीच करनी शुभ रहेगी।
करवा चौथ व्रत की पूजा विधि
सुबह की विधि (सरगी और संकल्प)
- सूर्योदय से पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर सास द्वारा दी गई सरगी का सेवन करें।
- सूर्योदय के बाद निर्जला व्रत का संकल्प लें।
शाम की पूजा की तैयारी
- शाम की पूजा से पहले सोलह श्रृंगार करके तैयार हो जाएं।
- पूजा स्थल को गंगाजल से साफ करें और वहां एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
- चौकी पर माता पार्वती, भगवान गणेश, माता करवा और शिवजी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- चौकी के पास जल से भरा एक कलश रखें।
- कलश पर कलावा बांधें और उसके ऊपर आम या अशोक के 5/7 पत्ते रखें।
- मिट्टी के करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं।
- करवे में जल भरें और उसके ऊपर ढक्कन लगाएं।
- करवे के ढक्कन के ऊपर कपास और शक्कर रखें।
संध्या पूजा की विधि
- गणेश जी, शिव जी, माता पार्वती और करवा माता का स्मरण करें।
- सभी देवी-देवताओं को रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
- माता पार्वती और माता करवा को सुहाग का सामान अर्पित करें।
- हाथ में गेहूं के दाने और दूर्वा लेकर करवा चौथ व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
- कथा के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें।
- सास या किसी सुहागिन महिला के लिए 'बायाना' निकालें। बायना में साड़ी/सूट, श्रृंगार का सामान, मिठाई और दक्षिणा का होना जरूरी है।
चंद्र दर्शन और व्रत का पारण
- चंद्रमा निकलने के बाद छलनी में जलता हुआ दीपक रखें।
- छलनी से पहले चांद के दर्शन करें और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।
- चंद्र देव को जल से अर्घ्य दें।
- पति के हाथों से जल और मिठाई खाकर अपना व्रत खोलें।
- अंत में पति के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें।
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करवा चौथ पर जपने वाले मंत्र
- गणेश पूजा मंत्र- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ ओम गं गणपतये नमो नम:
- शिव पूजा मंत्र- ओम नम: शिवाय
- देवी पार्वती पूजा मंत्र- देहि सौभाग्य आरोग्यं देहि मे परम् सुखम्। सन्तान देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे।।
- माता करवा पूजा मंत्र- करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
- चंद्रमा अर्घ्य मंत्र- गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥
करवा चौथ का व्रत कब खुलेगा?
करवा चौथ का व्रत चंद्रोदय होने के बाद चंद्र देव की पूजा करने के पश्चात खोला जाता है। आज करवा चौथ पर चंद्रोदय रात 08:18 बजे होगा, जिसके बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।
