Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत की एक महत्वपूर्ण परंपरा 'बायना' (साड़ी, सुहाग का सामान, मिठाई और फल आदि से सजी थाली) देने की है। मान्यता है कि शाम की पूजा के बाद सास को बायना भेंट कर उनका आशीर्वाद लेने से ही व्रत पूर्ण माना जाता है। हालांकि, कई बार परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि सास पास नहीं होतीं या इस दुनिया में नहीं रहतीं, जिसे लेकर महिलाओं के मन में अक्सर संशय रहता है।
शास्त्रों में किसी भी रस्म से ऊपर हमारी निष्ठा और पूजा के संकल्प को महत्व दिया गया है। यदि आप किसी कारणवश अपनी सास को बायना नहीं दे पा रही हैं, तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। आप अपनी सुविधा और परिस्थिति के अनुसार कुछ विशेष विकल्पों को अपना सकती हैं, जिससे आपकी पूजा और व्रत की पूर्णता में कोई बाधा नहीं आएगी।
सास के दूर होने या न होने पर बायना देने के विकल्प
यदि आपकी सास किसी दूसरे शहर या विदेश में रहती हैं, तो आप उनके नाम का बायना अलग निकाल कर रख दें। इसमें साड़ी, सुहाग का सामान, मिठाई, फल और कुछ दक्षिणा शामिल करें। पूजा संपन्न होने के बाद आप वीडियो कॉल या फोन के माध्यम से उनसे आशीर्वाद अवश्य लें। जब भी आप अगली बार अपनी सास से मिलें, तो यह बायना उन्हें भेंट कर दें।
यदि सास का देहांत हो चुका है, तो आप उनकी जगह ससुराल पक्ष की किसी अन्य बड़ी महिला को बायना दे सकती हैं। आप अपनी जेठानी या ननद को सास का दर्जा देकर उन्हें बायना भेंट कर सकती हैं। इसके अलावा, ससुराल पक्ष की मौसी सास या बुआ सास के पैर छूकर भी यह थाली उन्हें दी जा सकती है। यदि ससुराल पक्ष में कोई बड़ी महिला उपलब्ध नहीं है, तो आप अपनी मां या बड़ी बहन को भी बायना दे सकती हैं।
वहीं, यदि आपके आसपास ससुराल या मायके का कोई भी रिश्तेदार मौजूद नहीं है, तो मंदिर में दान देना एक उत्तम और शास्त्रीय विकल्प माना जाता है। आप मंदिर में किसी पंडित जी की पत्नी को बायना भेंट कर सकती हैं। इसके अतिरिक्त, आप सुहाग की सामग्री माता पार्वती को अर्पित कर सकती हैं और थाली में रखे मीठे व फलों को किसी गाय को खिला सकती हैं। यह सभी तरीके आपकी श्रद्धा और भक्ति को पूर्ण करने के लिए पर्याप्त माने गए हैं।
