Masik Karthigai 2026: प्रत्येक माह जिस दिन आकाश में कृतिका नक्षत्र प्रबल होता है, उस दिन मासिक कार्तिगाई का पर्व मनाया जाता है। मासिक कार्तिगाई को कार्तिगाई दीपम और कार्तिकाई दीपम के नामों से भी जाना जाता है, जो मुख्य रूप से तमिल हिंदू समुदाय के लोग मनाते हैं। इस दिन शाम के समय मंदिरों, घरों और गलियों में तेल के दीपक एक पंक्ति में जलाए जाते हैं, जिसे महादीपम कहते हैं। कार्तिगाई दीपम पर्व को देवों के देव महादेव के सम्मान में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जगत के पालनहार भगवान विष्णु और सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी को अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए इस दिन भगवान शिव ने स्वयं को प्रकाश की अनन्त ज्योति में बदल लिया था।
मान्यता है कि जो लोग मासिक कार्तिगाई के दिन शिव जी और उनके पुत्र भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं, उनके बिगड़े काम बनने लगते हैं। साथ ही विरोधियों से लड़ने की शक्ति, साहस और तेज की प्राप्ति होती है, जबकि दीप जलाने से जीवन में ज्ञान, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। चलिए अब जानें मासिक कार्तिगाई की पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर आरतियों के लिरिक्स के बारे में।
मासिक कार्तिगाई की पूजा किस समय करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक कार्तिगाई की पूजा सुबह और शाम दोनों समय की जाती है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की उपासना की जाती है, जबकि शाम में सूर्यास्त के बाद घरों और मंदिरों में दीपक जलाए जाते हैं।
मासिक कार्तिगाई की पूजा का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय- सुबह 6:29 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:47 बजे से लेकर 5:38 बजे तक
- सूर्यास्त- शाम 5:40 बजे
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:40 बजे से लेकर 6:06 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:40 बजे से लेकर 6:57 बजे तक
मासिक कार्तिगाई की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र धारण करें।
- घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल की सफाई करें।
- पूजा स्थल पर भगवान शिव और कार्तिकेय देव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- व्रत का संकल्प लें।
- देवताओं को चंदन, कुमकुम, अक्षत, गंगाजल, फल, फूल, मोरपंख और मिठाई अर्पित करें। इस दौरान 'ॐ नमः शिवाय॥' और 'ॐ शरवणभव॥' मंत्र का जाप करते रहें।
- आरती करके पूजा का समापन करें।
- शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर चावल के आटे से रंगोली बनाएं।
- घर के मंदिर, घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे और छत पर मिट्टी के दीपक जलाएं।
- भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की कपूर व धूप से आरती करें।
- परिवार के सभी सदस्यों के बीच मिठाई का वितरण करें।
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मासिक कार्तिगाई पर जरूर करें ये 2 आरतियां
भगवान शिव की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
कार्तिकेय जी की आरती
जय जय आरती वेणु गोपाला
वेणु गोपाला वेणु लोला
पाप विदुरा नवनीत चोरा
जय जय आरती वेंकटरमणा
वेंकटरमणा संकटहरणा
सीता राम राधे श्याम
जय जय आरती गौरी मनोहर
गौरी मनोहर भवानी शंकर
सदाशिव उमा महेश्वर
जय जय आरती राज राजेश्वरि
राज राजेश्वरि त्रिपुरसुन्दरि
महा सरस्वती महा लक्ष्मी
महा काली महा लक्ष्मी
जय जय आरती आन्जनेय
आन्जनेय हनुमन्ता
जय जय आरति दत्तात्रेय
दत्तात्रेय त्रिमुर्ति अवतार
जय जय आरती सिद्धि विनायक
सिद्धि विनायक श्री गणेश
जय जय आरती सुब्रह्मण्य
सुब्रह्मण्य कार्तिकेय
