करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखद दांपत्य जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में करवा माता के साथ भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा का विधान है। पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। इस वर्ष करवा चौथ को लेकर सोशल मीडिया पर भद्रा के साये को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिससे व्रती महिलाओं में संशय की स्थिति बनी हुई है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, करवा चौथ का व्रत इस वर्ष 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत मनाया जाता है। कुछ क्षेत्रों में, जहां अमांत पंचांग का पालन होता है, वहां इसे आश्विन कृष्ण चतुर्थी के रूप में जाना जाता है।
भद्रा का समय और पूजा पर प्रभाव
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पंचांग की गणना में भद्रा को 'विष्टि करण' कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा के दौरान शुभ कार्यों को शुरू करने से बचने की परंपरा रही है, क्योंकि माना जाता है कि इस समय किए गए धार्मिक कार्य निष्फल हो सकते हैं। भद्रा सूर्यदेव और छाया की पुत्री मानी गई हैं। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष भद्रा 28 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 37 मिनट पर शुरू होगी और 28 अक्टूबर की मध्यरात्रि 1 बजकर 7 मिनट तक रहेगी।इस गणना के आधार पर यह स्पष्ट है कि 29 अक्टूबर को सूर्योदय से काफी पहले ही भद्रा समाप्त हो जाएगी। इस कारण करवा चौथ के दिन पूजा के समय भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भद्रा का प्रभाव करवा चौथ की पूजा या व्रत पर नहीं पड़ेगा।
सरगी और पूजा की विधि
करवा चौथ के व्रत में सूर्योदय से पूर्व 'सरगी' (व्रत शुरू होने से पहले किया जाने वाला भोजन) ग्रहण करने की परंपरा है। चूंकि भद्रा 28 अक्टूबर की रात को ही समाप्त हो रही है, इसलिए सरगी ग्रहण करने में भी किसी प्रकार की बाधा नहीं है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि व्रती महिलाएं बिना किसी संशय के सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण कर सकती हैं।ऐसे में महिलाएं अपने शहर के अनुसार निर्धारित शुभ मुहूर्त में शाम की पूजा संपन्न करें और चंद्र दर्शन के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत खोलें। पंचांग की सही गणना के अनुसार, करवा चौथ के दिन भद्रा का प्रभाव न होने के कारण व्रती महिलाएं निश्चिंत होकर विधि-विधान से पूजा कर सकती हैं।
