Karwa Chauth 2026 Ka Chand Aaj Kitne Baje Niklega Punjab Mein: इस साल 29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ मनाया जा रहा है। करवा चौथ के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत में महिलाएं पूरे दिन पानी तक नहीं पीती हैं। शाम को करवा चौथ माता की पूजा करने के बाद उन्हें चांद निकलने का इंतजार रहता है। चंद्रमा के दर्शन करने और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। आइए जानते हैं कि पंजाब के अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला और दूसरे शहरों में चांद कितने बजे निकलने की संभावना है।
पंजाब के शहरों में करवा चौथ पर चांद निकलने का समय
करवा चौथ पर हर शहर में चंद्रोदय का समय थोड़ा अलग हो सकता है। ऐसे में अगर आप पंजाब में रहती हैं और व्रत रख रही हैं, तो अपने शहर के हिसाब से चांद निकलने का समय जान लें।
1- अमृतसर: रात 8:18 बजे
2- जालंधर: रात 8:16 बजे
3- लुधियाना: रात 8:16 बजे
4- पटियाला: रात 8:15 बजे
5- चंडीगढ़: रात 8:12 बजे
6- मोहाली: रात 8:13 बजे
7- मोगा: रात 8:14 बजे
8- बठिंडा: रात 8:22 बजे
9- मानसा: रात 8:25 बजे
10- रूपनगर: रात 8:08 बजे
ये समय अलग-अलग पंचांग और प्रकाशित चंद्रोदय अनुमानों के आधार पर दिए गए हैं। इनमें अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं अपने स्थानीय पंचांग से भी समय की पुष्टि कर लें। बादल या खराब मौसम होने पर चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है।
करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?
करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने और विधि-विधान से पूजा करने के बाद व्रत पूरा होता है। इसके लिए महिलाएं शाम को पूजा की थाली तैयार करती हैं। इसमें दीपक, फूल, अक्षत, मिठाई, जल से भरा पात्र और पूजा की दूसरी जरूरी सामग्री रखी जाती है। चांद निकलने के बाद महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करती हैं और परंपरा के अनुसार जल अर्पित करके अर्घ्य देती हैं। कई परिवारों में छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा है। इसके बाद पति की आरती की जाती है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।
चांद देखने के बाद कब करें व्रत का पारण?
करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। पारंपरिक रीति के अनुसार, महिलाएं अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत का पारण करती हैं। इसके बाद मिठाई या भोजन ग्रहण किया जाता है। अगर आप भी करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, तो पूजा की तैयारी पहले से कर लें, ताकि चांद निकलने के बाद जल्दबाजी न हो। चंद्रोदय का समय संभावित होता है, इसलिए केवल घड़ी के समय पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय परंपरा और पंचांग का ध्यान रखें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक जानकारी और चंद्रोदय का समय सामान्य जानकारी पर आधारित है। अलग-अलग पंचांगों में समय का अंतर हो सकता है। सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
