Shardiya Navratri 2026 Day 1 Today (Maa Shailputri puja time vidhi mantra bog): साल में कुल 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें से शारदीय नवरात्रि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का आरंभ होता है, जिसका समापन 9 दिन बाद नवमी तिथि पर होगा। इस बार शारदीय नवरात्रि का आरंभ आज 11 अक्टूबर, रविवार से हुआ है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। आज नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना करने के पश्चात मां दुर्गा के पहले स्वरूप देवी शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली आती है। साथ ही चंद्र ग्रह के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। आज यहां पर आप देवी शैलपुत्री के स्वरूप, पूजा के शुभ मुहूर्त, विधि और प्रिय चीजों के बारे में जानेंगे।
देवी शैलपुत्री का स्वरूप
देवी सती ने जब आत्मदाह किया था तो उसके बाद देवी पार्वती ने पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में देवी शैलपुत्री स्वरूप में जन्म लिया था। संस्कृत में शैल का अर्थ 'पर्वत' होता है। इसी वजह से देवी पार्वती के इस स्वरूप को शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। देवी शैलपुत्री को 2 भुजाओं के साथ वाहन बैल पर दर्शाया गया है। माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल है, जबकि बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित है।
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन की तिथि
- आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ- कल 10 अक्टूबर 2026 को रात 09:19 बजे
- आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का समापन- आज 11 अक्टूबर 2026 को रात 09:30 बजे
देवी शैलपुत्री की पूजा का मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:40 बजे से 5:30 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:05 बजे से 6:19 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 3:55 बजे से शाम 5:34 बजे तक
देवी शैलपुत्री की प्रिय चीजें
- प्रिय पुष्प- चमेली
- प्रिय रंग- सफेद
- प्रिय भोग- शुद्ध गाय का देसी घी
- प्रिय मंत्र- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
- प्रिय प्रार्थना-
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
- स्तुति-
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- ध्यानम्-
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
पूणेन्दु निभाम् गौरी मूलाधार स्थिताम् प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥
- स्तोत्रम्-
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानन्द प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह विनाशिनीं।
मुक्ति भुक्ति दायिनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
- कवचम्-
हींकारः पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥
श्रींकार पातु वदने लावण्या महेश्वरी।
हुंकार पातु हृदयम् तारिणी शक्ति स्वघृत।
फट्कार पातु सर्वाङ्गे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥
भक्ति टाइम्स पर ये भी पढ़ें- आज इस समय से शुरू होगा घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, जानें कलश स्थापना की विधि और सभी जरूरी नियम
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
आज सुबह जल्दी उठने के बाद शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करें, जिसके बाद मां दुर्गा की मूर्ति के साथ देवी शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। देवी दुर्गा और माता शैलपुत्री का ध्यान करने के पश्चात पूजा तथा व्रत का संकल्प लें। मां शैलपुत्री को चंदन, अक्षत, पुष्प, फल और मिठाई अर्पित करें। इस दौरान देवी शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें। देवी शैलपुत्री की प्रार्थना, ध्यानम्, स्तोत्रम्, कवचम् और चालीसा का पाठ करें।
नवरात्रि के पहले दिन के व्रत की कथा पढ़ें। आरती करके पूजा का समापन करें। शाम में फिर से देवी शैलपुत्री की पूजा करने के बाद आप अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।
मां शैलपुत्री की आरती (Maa Shailputri Aarti Lyrics in Hindi)
शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार॥
शिव-शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने न जानी॥
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सुमिरे सो सुख पावे॥
रिद्धि सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू॥
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती जिसने तेरी उतारी॥
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो॥
घी का सुन्दर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के॥
श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें।
प्रेम सहित फिर शीश झुकायें॥
जय गिरराज किशोरी अम्बे।
शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे॥
मनोकामना पूर्ण कर दो।
चमन सदा सुख सम्पत्ति भर दो॥
जय मां शैलपुत्री!
