आज के दौर में ऑफिस का तनाव और मानसिक दबाव आम समस्या बन गए हैं। अक्सर लोग अपने करियर में आने वाली परेशानियों या डिप्रेशन के लिए सीधे तौर पर अपने बॉस या कार्यस्थल के माहौल को जिम्मेदार ठहराते हैं। हालांकि, वैदिक ज्योतिष के नजरिए से देखें तो इसके पीछे केवल बाहरी परिस्थितियां ही नहीं, बल्कि ग्रहों की चाल और व्यक्ति की अपनी मानसिक स्थिति का भी गहरा संबंध होता है।
कार्यस्थल पर महसूस होने वाला तनाव हमेशा वास्तविक नहीं होता। कई बार यह केवल व्यक्ति की मानसिक स्थिति का परिणाम होता है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा राहु या बुध जैसे ग्रहों के साथ पीड़ित अवस्था में हो, तो वह व्यक्ति बेवजह भ्रम और अत्यधिक सोचने (ओवरथिंकिंग) की समस्या से घिर जाता है। इसी तरह, चंद्रमा पर केतु का प्रभाव मन में एक अज्ञात भय पैदा करता है, जिससे व्यक्ति को ऑफिस में सब कुछ नकारात्मक लगने लगता है, जबकि वास्तविकता में वहां कोई बड़ी समस्या नहीं होती।
करियर में बाधा और ग्रहों का गोचर
ज्योतिष में शनि को करियर और प्रोफेशन का मुख्य कारक माना गया है। कुंडली के दसवें और ग्यारहवें घर में शनि की स्थिति आमतौर पर शुभ परिणाम देने वाली मानी जाती है। लेकिन जब ग्रहों का गोचर (ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि में जाना) प्रतिकूल होता है, तो करियर में चुनौतियां बढ़ जाती हैं। डॉ. अडवाल बताते हैं कि जब गोचर में शनि चंद्रमा के ऊपर से गुजरता है या सूर्य और मंगल जैसे ग्रहों से पीड़ित होता है, तो व्यक्ति को कार्यस्थल पर बेवजह की राजनीति और बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
नौकरी बदलने का सही समय कैसे चुनें?
तनाव के कारण जल्दबाजी में इस्तीफा देना करियर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। डॉ. अडवाल का मानना है कि नौकरी बदलने का निर्णय लेने से पहले ग्रहों की स्थिति का आकलन करना आवश्यक है। उनके अनुसार, यदि आपकी दशा-भुक्ति में बदलाव के योग बन रहे हैं, तो गोचर में शनि की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। जब शनि का संबंध शुक्र, बुध या गुरु जैसे शुभ ग्रहों के साथ बनता है, तो वह समय करियर में तरक्की और नई नौकरी के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। चूंकि शुक्र सुख-सुविधा और धन का कारक है, इसलिए शनि का इन ग्रहों के साथ पांचवें या नौवें घर में आना नई शुरुआत के लिए शुभ संकेत हो सकता है। अतः, किसी भी बड़े फैसले से पहले अपनी मानसिक स्थिति और ग्रहों के गोचर को समझना एक तार्किक और संतुलित कदम है।
