आजकल के आधुनिक निर्माण में एल-शेप (L-Shape) वाले मकान और फ्लैट्स काफी चलन में हैं। वास्तुशास्त्र के दृष्टिकोण से, ऐसे घर पूरी तरह से चौकोर या आयताकार नहीं होते, जिसके कारण इनमें कोई न कोई कोना कटा हुआ रह जाता है। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर का आकार वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार पूर्ण न होने पर इसका प्रभाव परिवार के सदस्यों के जीवन और घर के वातावरण पर पड़ सकता है। हालांकि, सही जानकारी और कुछ सरल उपायों के माध्यम से इन दोषों को दूर कर घर में खुशहाली और सकारात्मकता बनाए रखी जा सकती है।
वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, एल-शेप के घर में किस दिशा का कोना कटा हुआ है, इसका प्रभाव अलग-अलग होता है। यदि उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) का कोना कटा हो, तो यह मानसिक शांति और परिवार के आपसी तालमेल को प्रभावित कर सकता है। वहीं, दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) का कोना स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जिसके कटने से निर्णय लेने में कठिनाई और करियर में बाधाएं आ सकती हैं। इसी तरह, अग्नि तत्व से जुड़ा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) कोना कटने से आर्थिक समस्याओं और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं हो सकती हैं, जबकि उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) का कोना कटने से बाहरी सहयोग मिलने में कमी और व्यापारिक विकास में रुकावट आने की मान्यता है।
एल-शेप घर के लिए वास्तु टिप्स और सुधार के उपाय
वास्तुशास्त्र के अनुसार, एल-शेप वाले घरों में ब्रह्मस्थान यानी घर के बिल्कुल बीच के हिस्से का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस स्थान पर कभी भी भारी दीवार, शौचालय या कबाड़ नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसे घर का ऊर्जा केंद्र माना जाता है। इसके अलावा, घर का जो हिस्सा मुड़कर एल-शेप बनाता है, वहां अक्सर अंधेरा या गहरा कोना बन जाता है। इस स्थान को हमेशा साफ रखें और वहां कूड़ेदान या पुराना सामान रखने से बचें। बेहतर होगा कि इस मोड़ पर खिड़की या बालकनी की व्यवस्था करें ताकि वहां पर्याप्त धूप और ताजी हवा का संचार हो सके।यदि आप बिना किसी बड़ी तोड़फोड़ के वास्तु दोषों को कम करना चाहते हैं, तो कुछ उपाय काफी प्रभावी हो सकते हैं। सबसे पहले, घर के कटे हुए कोनों को संतुलित करने के लिए वहां शीशा (मिरर) लगाया जा सकता है, जिससे वह हिस्सा आभासी रूप से बढ़ा हुआ प्रतीत होता है। इसके अलावा, जमीन पर तांबे या पीतल की तार लगाकर घर को अलग-अलग चौकोर हिस्सों में विभाजित करना भी एक प्रचलित उपाय है, जिसे वास्तु दोष दूर करने में सहायक माना जाता है।
घर के अंधेरे कोनों में तेज रोशनी वाले बल्ब लगाएं और वहां छोटे इनडोर पौधे रखें, जिससे उस स्थान पर ताजगी और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। साथ ही, कमरों की व्यवस्था करते समय भी वास्तु का ध्यान रखना आवश्यक है। घर के मालिक या बड़े सदस्यों का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में, रसोई दक्षिण-पूर्व में और बैठक कक्ष उत्तर-पूर्व दिशा में रखना वास्तु के अनुसार उचित माना गया है। इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर एल-शेप वाले मकान में भी सुख-समृद्धि और सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
