पंचांग

शादी में बार-बार आ रही है देरी? ज्योतिषीय दृष्टिकोण से समझें इसके पीछे के संभावित कारण

शादी में देरी के पीछे क्या ज्योतिषीय कारण हो सकते हैं? वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि, राहु, केतु और मंगल जैसे ग्रहों का प्रभाव और सातवें भाव की भूमिका को समझना जरूरी है।

Image

शादी में बार-बार आ रही है देरी? ज्योतिषीय दृष्टिकोण से समझें इसके पीछे के संभावित कारण

जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक विवाह को लेकर कई बार लोगों को अनिश्चितता और देरी का सामना करना पड़ता है। अक्सर अच्छे रिश्ते आने के बावजूद बात आगे नहीं बढ़ पाती या अंतिम समय पर रिश्ता टूट जाता है। ऐसी स्थिति में मन में कई सवाल उठते हैं कि आखिर विवाह में बार-बार देरी क्यों हो रही है? वैदिक ज्योतिष में इन परिस्थितियों को समझने के लिए जन्म कुंडली के सातवें भाव और उससे संबंधित ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है।

वैदिक ज्योतिषी और रिलेशनशिप एक्सपर्ट राजीव यादव के अनुसार, विवाह से जुड़ी चुनौतियों को केवल एक ग्रह के आधार पर नहीं समझा जा सकता। इसके लिए कुंडली के सातवें भाव (विवाह का भाव), उसके स्वामी ग्रह, विवाह के कारक ग्रहों और गोचर (ग्रहों का वर्तमान भ्रमण) का समग्र अध्ययन आवश्यक है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ ग्रहों का प्रभाव विवाह में देरी या रिश्तों में आने वाली बाधाओं का संकेत माना जाता है।