सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है, जिसमें भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी का अपना अलग ही आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इस दिन को लेकर अक्सर भक्तों के मन में तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है कि व्रत किस दिन रखा जाए। इस वर्ष 2026 में परिवर्तिनी एकादशी की सही तिथि को लेकर स्पष्ट जानकारी लें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी वह पावन दिन है जब क्षीर सागर में शयन कर रहे भगवान विष्णु अपनी करवट बदलते हैं। इसी कारण इसे 'परिवर्तिनी' एकादशी कहा जाता है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
परिवर्तिनी एकादशी 2026: व्रत की सही तिथि
पंचांग की गणना के मुताबिक एकादशी तिथि का आरंभ 22 सितंबर की मध्य रात्रि 2 बजकर 1 मिनट पर होगा। यह तिथि 23 सितंबर को पूरे दिन विद्यमान रहेगी और 24 सितंबर की सुबह 4 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि 24 सितंबर को सूर्योदय से पूर्व ही एकादशी तिथि का समापन हो रहा है, इसलिए शास्त्र सम्मत यही है कि व्रत 23 सितंबर को ही रखा जाए। 23 सितंबर को एकादशी तिथि सूर्योदय के साथ ही पूरे दिन उपलब्ध रहेगी, जो व्रत के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई है।
परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
विष्णु पुराण के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ इस दिन उपवास रखते हैं, उनके जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल, पीले पुष्प, फल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।भक्तों का मानना है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रानुसार, इस दिन भगवान विष्णु के 'परिवर्तन' स्वरूप का ध्यान करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना भक्तों के लिए कल्याणकारी माना गया है।
