दिवाली का त्योहार खुशियों और रोशनी का पर्व है। इस दौरान हर घर को रंग-बिरंगी लाइटों और दीयों से सजाया जाता है। हालांकि, वास्तु शास्त्र के जानकारों का मानना है कि घर की सजावट में इस्तेमाल होने वाली ये लाइट्स केवल सुंदरता ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि घर की ऊर्जा को संतुलित करने में भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, सही दिशा में सही रंगों का चयन करने से घर के पंचतत्व सक्रिय होते हैं, जिससे सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार बढ़ता है। दिवाली के पावन अवसर पर घर के अलग-अलग कोनों में वास्तु के अनुरूप रोशनी का चुनाव करना काफी फलदायी माना जाता है। सही दिशा में सही रंग की लाइट लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन की देवी मां लक्ष्मी का आगमन सुगम होता है। आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार किस दिशा में कौन से रंग की लाइट लगाना शुभ माना गया है।
दिशाओं के अनुसार लाइट्स का सही चुनाव
घर की उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है। वास्तु के अनुसार, इस दिशा में हल्की नीली या सौम्य हरी लाइट लगाना करियर और व्यापार में नए अवसरों को सक्रिय करने वाला माना गया है। वहीं, घर के सबसे पवित्र स्थान यानी ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में हमेशा हल्की पीली या सॉफ्ट व्हाइट लाइट का उपयोग करना चाहिए, जिससे घर में मानसिक शांति और दिव्यता बनी रहती है।धन के प्रवेश द्वार माने जाने वाले आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में गुलाबी, हल्का लाल या नारंगी रंग की लाइट लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में धन का प्रवाह बना रहता है। पूर्व दिशा को मान-सम्मान और प्रगति से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए यहाँ हरी या हल्की पीली लाइट लगाना श्रेष्ठ है। इसके अलावा, बचत और लाभ की दिशा मानी जाने वाली पश्चिम दिशा में संतुलन के लिए सफेद या वॉर्म-व्हाइट लाइट का प्रयोग करना चाहिए।
लाइटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम
वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, दिवाली की शाम घर के मुख्य द्वार पर सुनहरी या वॉर्म येलो लाइट जरूर जलानी चाहिए, क्योंकि अंधेरा दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है, जबकि रोशनी मां लक्ष्मी का स्वागत करती है। उत्तर या ईशान कोण में बहुत तेज लाल या गहरे रंग की लाइट्स लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जल तत्व प्रभावित हो सकता है।सजावट के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घर में कोई भी खराब, टिमटिमाती या बंद पड़ी लाइट न लगी हो, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं। बिजली की झालरों के साथ-साथ मुख्य द्वार और पूजा घर में गाय के घी का दीपक जलाना भी अत्यंत शुभ और पारंपरिक माना गया है।
