Navratri Vastu Tips: नवरात्रि के पावन दिनों में घर के मुख्य दरवाजे को सजाने की खास परंपरा है। माना जाता है कि मुख्य दरवाजा घर में आने वाले लोगों के साथ सकारात्मकता और शुभ ऊर्जा का प्रतीक होता है। कई घरों में दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण, गेंदे के फूल, स्वास्तिक या शुभ-लाभ जैसे चिन्ह बनाए जाते हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि में दरवाजे पर इन चीजों को लगाने के पीछे क्या धार्मिक और वास्तु मान्यता है।
आम के पत्तों का तोरण क्यों लगाते हैं?
नवरात्रि में मुख्य दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण लगाने की परंपरा है। आम के पत्ते घर में शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं। पूजा-पाठ और कलश स्थापना में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। वास्तु में भी मुख्य द्वार को घर की ऊर्जा के प्रवेश का स्थान माना जाता है। इसलिए नवरात्रि में यहां आम के पत्तों का तोरण लगाने की परंपरा देखने को मिलती है।
गेंदे के फूल से सजावट
नवरात्रि के दिनों में गेंदे के फूलों से भी घर का मुख्य दरवाजा सजाने के परंपरा है। गेंदे का पीला और नारंगी रंग धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। देवी पूजा में भी गेंदे के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। फूलों की सजावट घर के माहौल को सकारात्मक और उत्सवपूर्ण बनाती है।
दरवाजे पर बनाया जाता है स्वास्तिक
नवरात्रि के दौरान कई लोग घर के मुख्य दरवाजे पर रोली, हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाते हैं। हिंदू धर्म में स्वास्तिक को मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत में स्वास्तिक बनाने की परंपरा रही है। नवरात्रि में देवी का स्वागत करने और घर में मंगल की कामना के लिए भी इसे मुख्य दरवाजे पर बनाया जाता है।
कलश और शुभ-लाभ के चिन्ह की भी परंपरा
कुछ घरों में मुख्य द्वार के दोनों तरफ शुभ-लाभ, ॐ या देवी के चरणों के चिन्ह बनाए जाते हैं। कई लोग दरवाजे के पास छोटा कलश भी रखते हैं। धार्मिक मान्यता में कलश को पूर्णता, समृद्धि और शुभता से जोड़ा जाता है। वहीं देवी के चरणों के निशान बनाने का भाव यह होता है कि मां दुर्गा घर में पधारें और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहे।
