नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति की उपासना का समय होता है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होना अत्यंत आवश्यक है। वास्तु शास्त्र के जानकारों का मानना है कि केवल घर की धूल-मिट्टी साफ करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि घर में मौजूद उन चीजों को भी हटाना जरूरी है जो वास्तु दोष का कारण बनती हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रखी कुछ अनुपयोगी और खराब वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती हैं, जिससे परिवार की सुख-समृद्धि और शांति प्रभावित हो सकती है। नवरात्रि के आगमन से पूर्व घर को शुद्ध और ऊर्जावान बनाने के लिए इन पांच चीजों को हटाना शुभ माना गया है।
वास्तु के अनुसार घर से हटाएं ये चीजें
सबसे पहले अपने पूजा घर की जांच करें। यदि वहां देवी-देवताओं की कोई खंडित मूर्ति या फटी हुई तस्वीर है, तो उसे तुरंत हटा दें। वास्तु शास्त्र में खंडित मूर्तियों को घर में रखना उचित नहीं माना जाता है। इन्हें आदर के साथ किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करना चाहिए या फिर किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख देना चाहिए।दूसरे स्थान पर सूखी तुलसी या कांटेदार पौधे आते हैं। तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए घर में सूखा तुलसी का पौधा रखना नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि से पहले इसे हटाकर नया हरा-भरा पौधा लगाना चाहिए। इसी तरह, घर में टूटी हुई झाड़ू रखना भी दरिद्रता को आमंत्रण देने जैसा है। झाड़ू का संबंध आर्थिक स्थिति से माना जाता है, इसलिए पुरानी या घिसी हुई झाड़ू को नवरात्रि शुरू होने से पहले बदल लेना चाहिए।
चौथी महत्वपूर्ण बात यह है कि घर में मौजूद एक्सपायर्ड दवाइयां, चटके हुए बर्तन, टूटा कांच या पुराने अखबार जैसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसी वस्तुएं राहु के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकती हैं। अंत में, घर में बंद पड़ी घड़ी और खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी हटा देना चाहिए। बंद घड़ी प्रगति में बाधा का संकेत मानी जाती है, जबकि खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान मानसिक तनाव का कारण बन सकते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन घर के मुख्य द्वार को विशेष रूप से साफ रखना चाहिए। मुख्य द्वार पर हल्दी और पानी से स्वास्तिक बनाना और आम के पत्तों का तोरण लगाना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मकता का प्रवेश होता है और मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है।
