Dhanvantri Ji Ki Aarti: धनतेरस का त्योहार सिर्फ धन-दौलत और सुख-समृद्धि की कामना का ही नहीं, बल्कि अच्छी सेहत और लंबी उम्र की प्रार्थना का भी पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जा रही है। इस खास मौके पर भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरती करने का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और आरती के पूरे लिरिक्स।
भगवान धन्वंतरि जी की आरती (Dhanvantari Aarti Lyrics in Hindi)
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
धन्वंतरि जी की आरती कब करें?
धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरती प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। साल 2026 में भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरती का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर 2026 की शाम 06:02 बजे से शाम 07:57 बजे तक रहेगा। इस समय प्रदोष काल और वृषभ काल का शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में आप इस समय में भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरती कर सकते हैं।
