Choti Diwali Aarti Sangrah: धनतेरस के दिन से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो जाती है। धनतेरस के अगले दिन छोटी दिवाली मनाई जाती है। इसे नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन से नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक है। छोटी दिवाली पर घर की साफ-सफाई करने, दीपक जलाने और देवी-देवताओं की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक आरती और मंत्रों का जाप करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और परिवार के सदस्यों को सुख-शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आगे पढ़ें छोटी दिवाली के पूजन में पढ़ी जाने वाली आरती...
भक्ति टाइम्स पर ये भी पढ़ें- दिवाली पर लक्ष्मी पूजन में कौड़ी, कमल गट्टा और गोमती चक्र क्यों रखे जाते हैं?
भगवान गणेश की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।। ..
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
भक्ति टाइम्स पर ये भी पढ़ें- 7 या 8 नवंबर कब है छोटी दिवाली?
लक्ष्मी माता की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन, सेवत हरि विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता....
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता....
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता....
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता....
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता....
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता....
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता....
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता....
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत
हरि विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता।
नोट- छोटी दिवाली पर श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। हालांकि पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों एवं परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।
